Nov ०५, २०२० १९:०० Asia/Kolkata
  • फ्रांस के दावे की खुली पोल,

अभिव्यक्ति की आज़ादी का दावा करने वाले फ्रांस ने ईरानी छात्रों द्वारा “हम मोहम्मद से प्यार करते हैं”  के डाक टिकटों को छापने की मांगी गई इजाज़त को देने से इंकार कर दिया।

समाचार एजेंसी फ़ार्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, फ्रांस में रहने वाले ईरानी छात्रों के एक संगठन द्वारा फ्रांस के डाक विभाग के क़ानूनों के अनुसार “हम मोहम्मद से प्यार करते हैं”  के स्लोगन के साथ डाक टिकट छपवाने की मांग अनुमति मांगी गई थी। ईरानी छात्रों के संगठन का कहना था कि हमने फ्रांसीसी डाक विभाग में आवेदन दिया था कि फ्रांस में रहने वाले लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हमे इस बात की इजाज़त दी जाए कि “हम मोहम्मद से प्यार करते हैं” के स्लोगन के साथ डाक टिकट छपवा सकें। इस आवेदन फ्रांसीसी डाक विभाग ने रद्द कर दिया।

फ्रांसीसी डाक विभाग ने आवेदन को रद्द करने के संबंध में तर्क देते हुए लिखा है कि “हम मोहम्मद से प्यार करते हैं” का स्लोगन धार्मिक है जिसे छापने की डाक विभाग अनुमति नहीं दे सकता है। फ्रांस में रहने वाले ईरानी छात्रों के अनुसार, फ्रांस के संविधान के मुताबिक़, इस देश में रहने वाला हर नागरिक अपने लिए विशेष डाक टिकट रख सकता है और अपनी डाक सेवा के लिए उसका इस्तेमाल भी कर सकता है। लेकिन फ्रांसीसी डाक विभाग ने ईरानी छात्रों को “हम मोहम्मद से प्यार करते हैं” के स्लोगन वाले डाक टिकट को छापने की इजाज़त नहीं दी।

उल्लेखनीय है कि फ्रांस की बदनाम ज़माना व्यांग पत्रिका शार्ली हेब्दो ने हाल ही में अंतिम ईश्वरीय दूत हज़रत मोहम्मद (स) का एक अपमानजनक कॉर्टून छापा था। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रां ने भी इस कॉर्टून के प्रकाशन का समर्थन करते हुए इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया था। फ्रांसी पत्रिका और फ्रांस के राष्ट्रपति के बयान की दुनिया भर में लगातार आलोचना हो रही है। (RZ)

 

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