Nov १८, २०२० १८:५४ Asia/Kolkata
  • फ़्रांस के दो बड़े अख़बारों की पड़ताल...पैग़म्बरे इस्लाम के अनादर से गंभीर संकट में फंस गया फ़्रांस...उबर पाना कठिन...ईसाई देश भी कर रहे हैं आलोचना

फ़्रांस के दो मशहूर अख़बारों ने अलग अलग लेख में उस संकट का जायज़ा लिया है जिसमें पैग़म्बरे इस्लाम के अनादर पर आधारित कार्टून के प्रकरण के चलते यह देश फंस गया है।

लोमोंड (Le Monde) और लोफ़ीगारो (Le Figaro) अख़बारों ने अलग अलग लेख प्रकाशित किए हैं किंतु इस बिंदु पर दोनों का मूल्यांकन समान दिखाई दे रहा है कि पैग़म्बरे इस्लाम के बारे में अनादरपूर्ण कार्टूनों के मामले में सरकार के रवैए के कारण जो संकट पैदा हुआ है यह देश उससे उबर नहीं पा रहा है।

हालत यह हो गई है कि दुनिया भार में मुसलमानों ने फ़्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का अभियान चला रखा है तो इसके कारण पश्चिमी देशों के भीतर भी फ़्रांस अलग थगल पड़ता जा रहा है।

लोमोंड ने राष्ट्रपति मैक्रां के दो साक्षात्कारों का हवाला दिया है। एक साक्षात्कार उन्होंने न्यूयार्क टाइम्ज़ को दिया था जिसमें साफ़ तौर पर मैक्रां ने कहा कि चार्ली हेब्दो मैगज़ीन के कार्यालय पर जब बड़ा हमला हुआ था तो विश्व के अनेक देशों ने फ़्रांस के साथ बढ़ चढ़ कर एकजुटता दिखाई थी मगर इस बार दुनिया के देशों की प्रतिक्रिया हताश करने वाली थी।

हद तो यह हो गई कि मैक्रां ने ख़ुद न्यूयार्क टाइम्ज़ से संपर्क करके कहा कि उन देशों में भी मीडिया फ़्रांसीसी सरकार की आलोचना कर रहा है जिसे हम मूल्यों की दृष्टि से अपने समान समझते हैं और इन देशों के अख़बार भी लिख रहे हैं कि फ़्रांस ने मुसलमानों से नफ़रत का प्रचार शुरू कर दिया है और यही सारे संकट की जड़ है।

मैक्रां ने मंत्रिमंडल की बैठक में फ़ायनन्शियल टाइम्ज़ अख़बार की आलोचना भी की जिसके एक कालम में तथाकथित इस्लामी अलगाववाद के ख़िलाफ़ फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के विवादित आंदोलन की भर्त्सना की गई थी।

लोफ़िगारो अख़बार ने लिखा कि फ़्रांस की सरकार ने अनादरपूर्ण कार्टूनों का समर्थन करके ख़ुद को जिस मुसीबत में फंसाया है उससे देश निकल नहीं पा रहा है।

अख़बार का कहना है कि मैक्रां ने अलजज़ीरा टीवी चैनल को इंटरव्यू देकर और विदेश मंत्री लोदरियान ने इस्लामी देशों की यात्रा करके इस पूरे प्रकरण में सफ़ाई देने की कोशिश की जिसका असर तो हुआ मगर देश अब भी संकट से बाहर नहीं निकल पाया है। विदेशों में फ़्रांसीसी दूतावासों को संदेश भेजा गया है कि वह देश के नागरिकों को चेतावनी जारी करें कि वह अपनी सुरक्षा का ख़याल रखें।

अख़बार के अनुसार फ़्रांस ने यह समझाने की बहुत कोशिश की है कि फ़्रांस की सरकार सभी की आज़ादी की पक्षधर है मगर इस्लामी समाजों में फ़्रांस की बात लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाई। यही नहीं फ़्रांस के वह घटक देश भी संतुष्ट नहीं हुए जहां की अधिकतर आबादी ईसाई है। यही वजह है कि न्यूयार्क टाइम्ज़, वाशिंग्टन पोस्ट और फ़ायनन्शियल टाइम्ज़ में भी फ़्रांस की नीतियों की आलोचना की जा रही है।

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