Nov २५, २०२० १८:१६ Asia/Kolkata
  • कौन हैं एंटोनी ब्लिंकन जो संभालेंगे अमरीकी विदेश मंत्रालय की कमान? इस नाम से क्यों घबराए हुए हैं नेतनयाहू और बिन सलमान?

अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने एंटोनी ब्लिंकन को विदेश मंत्री नामज़द किया है जिसके बाद ब्लिंकन के बारे में बहस शुरू हो गई है कि वह किस विचारधारा के व्यक्ति हैं।

ब्रिटिश वेबसाइट मिडिल ईस्ट आई ने ब्लिंक्न के व्यक्तित्व पर एक लेख प्रकाशित किया है जिसके अनुसार ब्लिंकन ईरान के बारे में कूटनैतिक मार्ग अपनाए जाने के पक्षधर हैं और इस्राईल के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। जब वह विदेश मंत्रालय संभालेंगे तो पश्चिमी एशिया के इलाक़े में उन्हें काफ़ी कठिन हालात का सामना करना होगा।

जो बाइडन ने महत्वपूर्ण पदों के लिए जिन अधिकारियों का चयन किया है उन्हें देखकर लगता है कि बाइडन उन उसूलों और नीतियों की ओर लौटना चाहते हैं जिन्हें ट्रम्प ने अपने काल में नज़रअंदाज़ किया।

ब्लिंकन कई साल तक जो बाइडन के साथ काम कर चुके हैं और राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान वह बाइडन के कैंपेन के विदेशी मामलों के प्रवक्ता थे और विदेशी मामलों में जो बाइडन और ब्लिंकन समान सोच रखते हैं।

ब्लिंकन का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय एलायंस मज़बूत किए जाएं, अमरीका ईरान के परमाणु समझौते में वापस लौटे जिससे ट्रम्प प्रशासन बाहर निकल गया था। उनका कहना है कि अमरीका की ओर से इस्राईल का समर्थन जारी रहना चाहिए।

अमरीकी विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग में एंटोनी ब्लिंकन बड़े मझे हुए कूटनयिक और अधिकारी समझे जाते हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति काल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में काम शुरू किया। वह अमरीकी कांग्रेस के ऊपरी सदन सेनेट में विदेशी मामलों की समिति में 2002 से 2008 तक काम करते रहे।

राष्ट्रपति ओबामा के शासन काल में ब्लिंकन कई ओहदों पर रहे। वह तत्कालीन उप राष्ट्रपति जो बाइडन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे जबकि राष्ट्रपति के उप सलाहकार रहे। ब्लिंकन डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर काफ़ी लोकप्रिय माने जाते हैं।

मिडिल ईस्ट आई के अनुसार ब्लिंकन को वरिष्ठ कूटनयिक के रूप में मध्यपूर्व में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जो ट्रम्प के शासनकाल में बहुत जटिल हो गई हैं।

ब्लिंकन इस्राईल के समर्थक हैं लेकिन उनका यह भी मानना है कि अमरीकी समर्थन को फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ इस्राईल की नीतियों के दायरे में इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।

मिडिल ईस्ट आई के अनुसार ईरान के साथ परमाणु समझौता ब्लिंकन के सामने बड़ी चुनौती साबित होगा क्योंकि वह इस समझौते के पक्के समर्थक हैं जबकि इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू इस समझौते के कट्टर विरोधी हैं। ब्लिंकन इस परमाणु समझौते पर लंबी वार्ता करने वाले अमरीकी प्रशासन का हिस्सा थे।

ब्लिंकन के सामने एक बड़ी चुनौती फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में अरब डिक्टेटरों से वाशिंग्टन के संबंधों के प्रारूप में बदलाव लाना भी है। ब्लिंकन कई बार ट्रम्प प्रशासन की निंदा कर चुके हैं कि मानवाधिकारों का खुलकर हनन करने वाली सरकारों से वह गहरे संबंध रखते हैं। उन्होंने कहा था कि जो बाइडन इन सरकारों से अपने संबंध में मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर पूरा ध्यान देंगे। ब्लिंकन यह भी कह चुके हैं कि बाइडन सरकार सऊदी अरब के साथ अमरीका के संबंधों पर पुनरविचार करेगी जिसे ट्रम्प शासन ने मानवाधिकारों के हनन, यमन में युद्ध अपराध और पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में खुली छूट दे रखी है।

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