Jan १८, २०२१ १८:२५ Asia/Kolkata

बुधवार 6 जनवरी को एक बार फिर अमरीकी लोकतंत्र की हक़ीक़त दुनिया के सामने बेनक़ाब हो गयी, जिस तरह अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के समर्थकों ने कैपिटल हिल पर हमला किया, अंदर घुस गये, तोड़फोड़ की और कांग्रेस के सद्स्यों को भयभीत किया और काफ़ी देर तक कांग्रेस पर क़ब्ज़ा किए रहे, वह इस बात को समझने के लिए काफ़ी है कि अमरीका में लोकतंत्र का क्या हाल है?

ट्रम्प के समर्थकों के कांग्रेस पर हमले के दौरान एक सुरक्षाकर्मी सहित 5 लोग हताहत और सैकड़ों घायल हुए। ट्रम्प ने अपने समर्थकों को कांग्रेस पर हमले के लिए उकसाने पर माफ़ी तक नहीं मांगी बल्कि उन्होंने यह दावा किया कि उनकी चुनावी टीम ने चुनावी नतीजों पर एतेराज़ के लिए सारे क़ानूनी रास्तों पर अमल किया और हमारा मक़सद, उनके कथनानुसार, चुनाव परिणामों की सत्यता की पुष्टि करना था। ट्रम्प ने अपने इस वीडियो संदेश में कट्टरपंथी दंगाइयों और समर्थकों को कांग्रेस पर हमले के लिए उकसाने पर न तो पछतावा दिखाया और न ही ज़बान से माफ़ी मांगी, उन्होंने अपने दंगाई समर्थकों की इस कार्यवाही की आलोचना की लेकिन फिर उन्होंने बाद में अपना बयान बदल दिया। हक़ीक़त तो यह है कि ट्रम्प ने अमरीकी लोकतंत्र को बेनक़ाब करके दुनिया के सामने पेश किया है।  ट्रम्प के समर्थकों ने कांग्रेस पर उस समय हमला किया जब हालिया चुनाव में उनके डेमोक्रेट प्रतिस्पर्धी जो बाइडन की जीत की पुष्टि के लिए सीनेट और प्रतिनिधि सभा की संयुक्त बैठक हो रही थी, हमले की वजह से कांग्रेस के सदस्य छिपने पर मजबूर हो गये, जमकर तोड़फोड़ हुई और कांग्रेस लगभग छह घंटे तक बंद रही जबकि शहर के प्रशासन को रात में कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर होना पड़ा। कहा जाता है कि कांग्रेस पर ट्रम्प समर्थकों का यह हमला, 1814 की ब्रिटिश सैन्य चढ़ाई के बाद से सबसे भीषण हमला था। 1814 में ब्रिटिश सेना ने ब्लैडन बर्ग युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद अमरीकी कांग्रेस की इमारात को आग लगा दी थी, जिसके परिणाम में अमरीकी कांग्रेस की इमारात जलकर राख हो गयी थी।

 

यद्यपि कांग्रेस के सदस्यों ने ट्रम्प के बाक़ी बचे दिनों में ही उनके विरुद्ध क़ानूनी कार्यवाही और उनके अपदस्थ किए जाने की मांग की है लेकिन अमरीकी उप राष्ट्रपति माइक पेन्स ने संविधान के 25वें संशोधन पर अमल करने से इन्कार कर दिया, उनका कहना था कि इससे देश में अराजकता और अशांति फैल सकती है, इसका मतलब यह है कि अगर किसी के पास देश में अशांति और अराजकता फैलाने की ताक़त हो तो उसके ख़िलाफ़ कोई क़ानूनी कार्यवाही करने से पहले प्रशासन को बार बार सोचना पड़ता है।राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि यद्पि 20 जनवरी को जो बाइडन के शपथग्रहण को रोकने की ट्रम्प की कोशिशें विफल हो चुकी हैं, लेकिन चुनावी नतीजे को बदलने के लिए ट्रम्प को मिलने वाले जन समर्थन ने अमरीकी लोकतंत्र को बुरी तरह से नुक़सान पहुंचाया है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अपने ही देश की कांग्रेस पर हमला करवा कर जिसको अमरीका के इतिहास की सबसे बुरी घटना कहा जा रहा है, जिस तरह लोकतंत्र का अपमान किया और अपने देश के क़ानून की धज्जियां उड़ा दीं, वह उनके विरुद्ध संविधान के 25वें संशोधन के अनुसार क़ानूनी कार्यवाही के लिए काफ़ी है, लेकिन अमरीकी राजनेताओं को यह भय है कि ट्रम्प दंगाइयों को मैदान में उतार सकते हैं, इससे इस बात का भी पता चलता है कि अमरीका में क़ानून व्यवस्था कितनी कमज़ोर है कि ट्रम्प के सामने वह बेबस नज़र आती है। 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर ट्रम्प समर्थकों द्वारा किए गए हमले को लेकर जहां पूरी दुनिया में इसकी निंदा हो रही है वहीं अमेरिका के उप राष्ट्रपति माइक पेन्स ने भी इस घटना को शर्मसार कर देने वाली घटना बताया है। अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक के नेता सीनेटर चक शूमर ने इस घटना को आतंकवादी घटना बताया है, वहीं सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।

कांग्रेस पर हमले के बाद अमरीका के कुछ राजनेताओं यहां तक कि वाशिंग्टन डीसी के मेयर ने इसको आतंकवाद का नाम दिया लेकिन अमरीकी पुलिस और सुरक्षा बलों ने इस आतंकवाद को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जबकि कुछ महीना पहले जब अमरीका में ब्लैक लाइफ़ मैटर प्रदर्शनों के अंतर्गत लोगों ने वाइट हाऊस और कांग्रेस के सामने प्रदर्शन किए थे लेकिन पुलिस और सुरक्षा बलों ने इन केन्द्रों से निकट आने से प्रदर्शनकारियों को रोक दिया था जबकि ट्रम्प के समर्थकों ने कांग्रेस पर हमला कर दिया और पुलिस और सुरक्षा बल मूक दर्शक बने रहे। यूरोपीय देश जर्मनी में रह रहे वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर असलम सैयद का कहना है कि अमेरिका में 6 जनवरी को होने वाली घटना कोई संयोग नहीं है बल्कि यह हमला योजनाबद्ध तरीक़े से हुआ है। पूरे यक़ीन के साथ यह कहा जा सकता है कि अमरीका में ब्लैक लाइफ़ मैटर के अंतर्गत नस्लभेद के विरुद्ध होने वाले प्रदर्शन में शामिल लोग, कांग्रेस में घुसने की बात ही छोड़िए, अगर उसके क़रीब भी पहुंचने के लिए, सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश करते तो चार के बजाए 400 लाशें गिरतीं, यही अमरीका का सही चेहरा है और यही अमरीकी लोकतंत्र और समानता की पहचान है।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने अपने भाषण में इस घटना का हवाला देते हुए कहा कि आज अमरीका की यह हालत हो गई है। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता का कहना है कि अमरीकी मूल्यों का मज़ाक़ अमरीका के मित्र भी उड़ा रहे हैं जबकि अमरीकी मूल्य का बहुत ढिंढोरा पीटा जाता है।

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