Jan २१, २०२१ २१:२० Asia/Kolkata
  • ट्रम्प के विवादित फैसलों पर चली बाइडेन की तलवार

अमरीका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डोनाल्ड ट्रम्प के कई विवादित फैसलों को बदल दिया है।

कहते हैं कि सत्ता के नशे में चूर नेता अधिकतर ग़लत फैसले करते हैं।  इन ग़लत फैसलों के कारण न जाने कितने लोगों को आर्थिक और मानसिक नुक़सान होता है।  एक समय एसा भी आता है कि जब सत्ता के दुरूपयोग करने वाले को सत्ता छोड़नी पड़ती है और उसके सारे फैसले धरेे रह जाते हैं।

अमरीका में बाइडेन की नई सरकार का गठन हुआ है।  यह नई सरकार बहुत से पुराने विवादित फैसलों को बदल रही है।  जो बाइडेन ने अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद ही कई महत्वपूर्व फैसले कर डाले।   उन्होंने पेरिस जलवायु समझौते में अमरीका की पुनः वापसी पर हस्ताक्षर किये।  इसी के साथ बाइडेन ने ट्रम्प के मुस्लिम ट्रैवेल बैन के फैसले को भी निरस्त कर दिया।  बाइडेन ने मैक्सिको बार्डर पर दीवार बनाने के ट्रम्प के फैसले को पलटकर इसकी फंडिंग ही रोक दी है।  अमरीका के नए राष्ट्रपति ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को अनिवार्य घोषित किया है।  ट्रम्प ने अपने सत्ताकाल में कुछ मुस्लिम देशों के नागरिकों की अमरीका यात्रा पर रोक लगा दी थी।

यहां पर हमारे लिए जो चीज़ विशेष महत्व रखती है वह ट्रम्प के अत्याचारपूर्ण फैसलों को रोका जाना है, हालांकि इस स्थान पर हमें इराक़ और सीरिया में अमरीका की ग़ैर क़ानूनी उपस्थिति और उसके दुष्परिणामों को नहीं भूलना चाहिए।  साथ ही अवैध ज़ायोनी शासन के साथ संबन्ध सामान्य करने के उद्देश्य से डील आफ सेंचुरी के लिए अरब देशों को उकसाने के अमरीकी प्रयासों को भी अनेदखा नहीं किया जा सकता।  इस स्थान पर यह सवाल पैदा होता है कि अमरीका के नए राष्ट्रपति बाइडेन, क्या इस देश की उन नीतियों को भी बदलने के प्रयास करेंगे जो दशकों से अरबों पर अवैध ज़ायोनी शासन के हितों को वरीयता देती आ रही हैं।

यह स्पष्ट है कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही दल संयुक्त लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हैं।  दोनों के बीच अंतर केवल उनकी शैली में है।  यह दोनो ही अमरीकी दल अमरीकी हितों की रक्षा करने, दूसरे राष्ट्रों धरोहरों को लूटने, उनको अपना ग़ुलाम बनाने तथा क्षेत्र में इस्राईल के हितों को सबसे ऊपर रखने जैसे वर्चस्ववादी लक्ष्यों को पूरा करने में एकमत हैं।मानवाधिकार संगठनों और बहुत से सामाजिक संगठनों ने इस बात पर बारंबार बल दिया है कि अमरीका और ज़ायोनी शासन ही आतंकवाद का स्रोत हैं।  यह वे लोग हैं जो पूरे विश्व में आतंकवाद फैलाते हैं।  इनका काम आतंकी गुटों को अस्तित्व देकर उनको अपने हितों के हिसाब से प्रयोग करना है।  इस बात को पूरी दुनिया ने महसूस किया है कि ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में अमरीका, अधिक आतंकी दिखाई दिया और उसने इस दौरान आतंकी गुटों का अधिक खुलकर समर्थन किया।

इस हिसाब से यह कहा जा सकता है कि ट्रम्प ने अपने सत्ताकल में जो कुछ ख़राब किया है उसको ठीक करना इस अर्थ में नहीं है कि यह काम बाइडेन के लिए आसान होगा।  उदाहरण स्वरूप ईरान के साथ परमाणु समझौते में वापसी, ईरान के अधिकारों को दृष्टिगत रखे बिना और हर प्रकार के अमरीकी प्रतिबंधों को समाप्त किये जाने तक संभव नहीं है।  हालांकि वाइडेन इस वापसी के बारे में बात कर चुके हैं।

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