Feb २८, २०२१ १५:२३ Asia/Kolkata
  • ईरानी मीज़ाइलों की ताक़त व सटीक निशाने पर अमरीकी जनरल की हैरत!

"वह ऐसा हमला था जैसा हमने पहले कभी नहीं देखा था, मीज़ाइल अत्यंत सटीक थे और वहीं पर लगे जहां ईरानी चाहते थे और अगर ईरानियों के मीज़ाइल हमले के बारे में अमरीका को पहले से सूचना नहीं मिली होती तो इस हमले में उसके कम से कम डेढ़-दो सौ सैनिक मारे जाते और बीस-तीस विमान तबाह हो जाते।"

यह मध्यपूर्व में अमरीका के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी का बयान है। सेंटकाॅम के कमांडर जनरल फ़्रैंक मेकेंज़ी ने पश्चिमी इराक़ में अमरीका की ऐनुल असद सैन्य छावनी पर ईरान के मीज़ाइल हमले के बारे में सीबीएस टीवी चैनल से बात करते हुए यह बात कही है। उनका पूरा इंटरव्यू कल प्रसारित होगा। सिर्फ़ एक सैन्य अधिकारी को पता है कि ऐनुल असद छावनी पर हमले के बारे में मध्यपूर्व में अमरीका के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी जनरल मैकेंज़ी के इस बयान का क्या मतलब है कि हमने अब तक इस जैसा हमला नहीं देखा था!!

 

जनरल मैकेंज़ी इसस पहले भी अमरीकी सेना के कई उच्च पदों पर काम कर चुके हैं और उनका यह दावा भी है कि अमरीकी सेना धरती की सबसे मज़बूत सेना है। उन्होंने इसी तरह पिछले कुछ दशकों में संसार के अनेक राष्ट्रों के ख़िलाफ़ अमरीका की लड़ाइयों में भाग लिया होगा या दूसरे शब्दों में उन्हें अनेक युद्धों का अनुभव होगा। तो जब ऐसा आदमी यह कहता है कि उसने ऐनुल असद छावनी पर ईरान के मीज़ाइल हमले जैसा कोई हमला नहीं देखा तो इसका मतलब एक कट्टर और पाश्विक दुश्मन की ओर से ईरान की सैन्य क्षमताओं और ईरानियों की बहादुरी को स्वीकार करना है।

 

अमरीका के एक वरिष्ठ जनरल का यह बयान कि ईरान के मीज़ाइल बड़े सटीक थे और वहीं जा कर गिरे थे जहां ईरानी चाहते थे, ईरान के एक पक्के और बड़े पुराने दुश्मन की ओर से इस बात की स्वीकारोक्ति है कि ईरान सैन्य तकनीक में काफ़ी आगे निकल चुका है और अमरीकी व इस्राईली मीडिया और इसी तरह उनके क्षेत्रीय पिछलग्गू बार बार ईरान के मीज़ाइलों पर सवाल खड़े करने और उन्हें ग़ैर अहम दर्शाने की कोशिश कर चुके हैं। क्या अब यह खोखले भोंपू, जनरल मैकेंज़ी के इस स्पष्ट बयान के बाद भी ईरान की मीज़ाइल क्षमता के बारे में कुछ बोल पाएंगे?

 

अगर जनरल मैकेंज़ी ने अपने पूरी उम्र में ऐनुल असद छावनी पर ईरान के हमले जैसा कोई हमला नहीं देखा है, जिसमें ईरान ने सिर्फ़ कुछ ही मीज़ाइलों का इस्तेमाल किया था तो यह सोचने वाली बात है कि अगर अमरीका समीकरण की ग़लती कर बैठे और ईरान के साथ युद्ध करना चाहे तो उस वक़्त जनरल मैकेंज़ी क्या कहेंगे? कुल मिला कर यह कि उन अरबों को जो अमरीका व इस्राईल की मदद की आस लगाए बैठे हैं, जनरल मैकेंज़ी के पूरे इंटरव्यू को देखने का मौक़ा नहीं गंवाना चाहिए जो कल प्रसारित होगा, शायद उन्हें भी फ़िलिस्तीन के मामले में वैसा ही पाठ मिल जाए जैसा मैकेंज़ी को मिला है और वे अपने तख़्त और ताज के लिए फ़िलिस्तीन का सौदा न करें। (HN)

 

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