Mar ०२, २०२१ ०५:११ Asia/Kolkata
  • आख़िरकार अमेरिका ने दिखा ही दिया अपना असली रूप, सऊदी अरब का समर्थन जारी रखने पर दिया बल

वाशिंग्टन ने कहा है कि वह सऊदी अरब के समर्थन के लिए प्रयास जारी रखेगा

अमेरिकी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि वाशिंग्टन यमनियों के हमलों के मुकाबले में आत्म रक्षा के लिए सऊदी अरब का समर्थन जारी रखेगा।

समाचार एजेन्सी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार नेड प्राइस ने वाशिंग्टन के समय के अनुसार सोमवार की दोपहर को कहा कि बाइडेन ने अपने बयान में यमन के संबंध में अमेरिका की विदेश नीतियों पर पुनर्विचार करने पर बल दिया है।

उन्होंने सऊदी पत्रकार खाशुकजी की हत्या के बारे में सीआईए की रिपोर्ट की ओर संकेत करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य खाशुकजी जैसी हत्या की पुनरावृत्ति को रोकना है।

अमेरिकी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने बल देकर कहा कि इस वक्त हम सऊदी अरब के व्यवहार पर नज़र रखे हुए हैं और सऊदी अरब के राजनीतिक बंदियों की स्वतंत्रता के लिए दबाव जारी रखेंगे।

अमेरिकी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने बल देकर कहा है कि खाशुकजी की हत्या में सऊदी अरब के 76 लोगों के नामों की सूची है और इन लोगों पर अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

साथ ही अमेरिकी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने यमन के विषय की ओर संकेत किया और दावा किया कि अमेरिका विभिन्न बहानों से सऊदी अरब पर हूसियों के हमलों को रोकने के प्रयास में है।

उन्होंने कहा कि यमन के 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र हूसियों व अंसारुल्लाह के नियंत्रण में हैं और उसे आतंकवाद की सूची में रखना घाटे व नुकसान का कारण है।

जानकार हल्कों का मानना है कि सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना सऊदी अरब ने 26 मार्च 2015 से यमन पर हमला आरंभ कर रखा है तब से लेकर आज तक अमेरिका सहित मानवाधिकारों की रक्षा का दम करने वाले देशों ने एक बार भी सऊदी अरब की भर्त्सना नहीं की है।

इसी प्रकार जानकार हल्कों का मानना है कि मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वालों की अर्थपूर्ण चुप्पी वास्तव में सऊदी अरब का समर्थन है और इस प्रकार के समर्थन के कारण ही किसी प्रकार की शर्म के बिना सऊदी अरब किसी प्रकार के अपराध में लेशमात्र भी संकोच से काम नहीं ले रहा है।

जानकार हल्कों का मानना व कहना है कि अगर हमलावर देश सऊदी अरब को आत्म रक्षा का अधिकार हासिल है तो जिस पर हमला किया गया है तो वह आत्म रक्षा के अधिकार का अधिक पात्र है।  

जानकार हल्के अमेरिकी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता के बयान को सऊदी अरब का खुला समर्थन मान रहे हैं और उनका मानना है कि अगर मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वालों का समर्थन न होता तो यमन पर हमलों को जारी रखना तो दूर की बात बल्कि सऊदी अरब के अंदर यमन पर हमला करने का साहस भी न होता।

बहरहाल यमनी जनता के खिलाफ सऊदी अरब के अपराधों के समर्थक भी उसके अपराधों में बराबर के भागीदार हैं। MM

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