Apr १५, २०२१ १०:०० Asia/Kolkata
  • डेनमार्क ने एक बार फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, बड़ी संख्या में सीरियाई शरणार्थियों के निवास परमिट किए रद्द

डेनमार्क ने सीरिया से आए शरणार्थियों को नागरिकता और निवास का परमिट देने से इनकार कर दिया है। हालिया कुछ दिनों के भीतर ही 94 सीरियाई नागरिकों को डेनमार्क सरकार ने सूचित किया कि उनका निवास परमिट रद्द किया जा रहा है। डेनमार्क सरकार ने यह आरोप लगाया है कि सीरियाई शरणार्थियों के कारण डेनमार्क में इस्लामी कट्टरवाद फैल रहा है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, डेनमार्क ने सीरिया से आए शरणार्थियों को नागरिकता और निवास का परमिट देने से इनकार कर दिया है। जिन सीरियाई नागरिकों को परमिट देने से मना किया गया है उनसे यह भी कहा गया है कि वे जल्दी ही दूसरे देशों में अपने रहने का ठिकाना तलाश लें।

यूरोप में लगातार बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया के कारण कई देश अब शरणार्थियों को नागरिकता देने के अपने फ़ैसले पर पुनरविचार कर रहे हैं। डेनमार्क के विदेश मंत्री जेप्पे कोफोड ने कहा कि सीरिया में कई स्थानों पर गृह युद्ध अभी भी चल रहा है, लेकिन उस देश में कई इलाक़े ऐसे भी हैं जहां स्थिति अलग है। संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल के विरोध के बावजूद डेनमार्क के अधिकारियों का मानना है कि सीरियाई शरणार्थी अब दमिश्क़ सहित कई शहरों को वापस लौट सकते हैं।

इस बीच डेनमार्क द्वारा सीरियाई शरणार्थियों के अस्थायी निवास परमिट को रद्द करने की योजना का संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने विरोध किया है। उसका मानना है कि सीरिया अभी इन लोगों के रहने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है। याद रहे कि इससे पहले जर्मनी ने शरणार्थियों को लौटाने की बात कही थी लेकिन आधिकारिक तौर पर शरणार्थियों को वापस भेजने का ऐलान करने वाला डेनमार्क पहला यूरोपीय देश है। जानकारों का कहना है कि डेनमार्क की सत्ताधारी सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी ऐंटी-इमिग्रेशन रुख अपना रही है ताकि दक्षिणपंथी पार्टियों का सामना कर सके। साथ ही जानकारों का यह भी मानना है कि डेनमार्क में आम लोगों के इस्लाम की ओर बढ़ते रुझान ने इस देश की सरकार को चिंता में डाल दिया है जिसके कारण उसने इससे निपटने के लिए सीरिया और अन्य मुस्लिम देशों से आए शरणार्थियों को वापस भेजने की योजना बनाई है।

वहीं डेनमार्क की संसद में एक बिल भी पेश किया गया है, जिसमें मस्जिदों को विदेशों से मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगाने की सिफ़ारिश की गई है। इस बिल में कहा गया है कि मस्जिदों को व्यक्तियों, संगठनों और संघों के पैसे को स्वीकार करने से रोका जाएगा जो लोकतांत्रिक मूल्यों, मौलिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का विरोध या उन्हें कम करते हों। ऐसे में माना जा रहा है कि डेनमार्क की सत्ताधारी पार्टी अपनी प्रतिद्वंद्वी दक्षिणपंथी पार्टियों का मुक़ाबला करने के लिए इस तरह के क़दम उठा रही है। (RZ)

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