May ०२, २०२१ १२:१६ Asia/Kolkata
  • पश्चिमी देशों के बीच इस्लाम विरोधी प्रतिस्पर्धा जारी, जर्मनी ने विश्व क़ुद्स दिवस के कार्यक्रमों पर लगाई रोक

कट्टरपंथी यहूदी और ज़ायोनियों के दबाव में आते हुए जर्मन अधिकारियों ने एलान किया है कि विश्व क़ुद्स दिवस के मौक़े पर बेर्लिन में किसी भी तरह के विरोध मार्च और कार्यक्रम की इजाज़त नहीं होगी।

समाचार एजेंसी फ़ार्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, जर्मनी में मौजूद कट्टरपंथी यहूदी और ज़ायोनी शासन के समर्थक गुट वर्षों से जर्मन सरकार पर यह दबाव बना रहे थे कि इस देश में विश्व क़ुद्स दिवस के मौक़े पर होने वाली रैलियों और कार्यक्रमों पर रोक लगे। जर्मन सरकार के क़ानून के अनुसार, ज़ायोनी शासन की तबाही के लिए किसी भी तरह का बयान या कार्य इस देश में ग़ैरक़ानूनी और प्रतिबंधित है। यह सब ऐसी स्थिति में है कि इस्लामोफ़ोबिया जर्मनी में लगातार जारी है। हाल ही में "बेन" शहर में रहने वाले तुर्की नागरिकों से संबंधित एक स्पोर्ट्स क्लब की दीवार पर मुसलमानों की पवित्र हस्तियों और स्थानों का अपमान करने वाले नारों को लिखा गया था।

 

उल्लेखनीय है कि जर्मनी की 8 करोड़ से ज़्यादा जनसंख्या है, फ्रांस के बाद यह दूसरा यूरोपीय देश है जहां मुसलमानों बड़ी संख्या में रहते हैं। जर्मनी में लगभग 41 लाख मुसलमान रहते हैं जिनमें 30 लाख मुस्लिम मूल रूप से तुर्की के हैं। हालिया कुछ वर्षों में जर्मनी में नस्लवाद और इस्लामोफ़ोबिया के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। (RZ)

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