May ०४, २०२१ १४:५३ Asia/Kolkata
  • रूस, स्विफ़्ट का तोड़ निकाल रहा है, चीन के पास तय्यार है, बस भारत बना ले तो स्विफ़्ट की धमकी बेअसर हो जाएगी

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ख़ारोवा ने बताया है कि मॉस्को, बैंकों के बीच वित्तीय लेन-देन के सिस्टम स्विफ़्ट से योरोप द्वारा निकाले जाने की स्थिति से निपटने की तय्यारी कर रहा है।

ज़ाख़ारोवा ने कहा है कि मॉस्को स्विफ़्ट से निकाले जाने की स्थिति में संभावित नुक़सान को कम से कम करने की कोशिश कर रहा है।

गौ़रतलब है कि यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव के ज़रिए रूस को स्विफ़्ट सिस्टम से निकालने की मांग की है।

हालिया हफ़्तों  में रूस को स्विफ़्ट सिस्टम से निकालने के विषय से मॉस्को-यूरोपीय संघ के संबंध, रूस की ओर से ब्रसल्ज़ के ख़िलाफ़ जवाबी कार्यवाही से और ख़राब हो गए हैं। रूस ने जवाबी कार्यवाही करते हुए, यूरोप के 8 अधिकारियों पर पाबंदी लगा दी है।

स्विफ़्ट सिस्टम से रूस के निकाले जाने के विषय की मॉस्को गंभीरता से समीक्षा कर रहा है।

स्विफ़्ट पूरी दुनिया में वित्तीय संस्थाओं और बैंकों के बीच वित्तीय संदेश पहुंचाने का एक अंतर्राष्ट्रीय सिस्टम है जिसके ज़रिए उनके बीच वित्तीय लेन-देन सुरक्षित तरीक़े से अंजाम पाता है। इस नेटवर्क का मुख्यालय बेल्जियम में है, लेकिन इसके बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्ज़ के सदस्य अमरीकी बैंकों के अधिकारी होते हैं। अमरीका बरसों से रूस को स्विफ़्ट से निकालने की धमकी दे रहा है।

ब्रिक्स नाम से दुनिया की उभरती हुयी आर्थिक ताक़तों के रूप में चीन और भारत के साथ रूस ने फ़ैसला लिया है कि आपस में स्विफ़्ट की जगह कोई नया वित्तीय सिस्टम बनाएं जिससे एक दूसरे से आसानी से जुड़ सकें। रूस के पास वित्तीय सिस्टम एसपीएफ़एस है जबकि चीन के वित्तीय सिस्टम का नाम सीआईपीएस है। दोनों ही इस सिस्टम से एक दूसरे से जुड़ने का इरादा रखते हैं, जबकि भारत के पास अभी तक इस तरह का सिस्टम नहीं है।  (MAQ/N)

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