Feb १०, २०२० १७:१५ Asia/Kolkata

इस्लामी शिक्षाओं और इस्लामी संस्कृति में वांछित समाज वह समाज है जो शक्ति और संप्रभुता के चरम पर हो।

ईश्वर सूरए अनफ़ाल की आयत संख्या साठ में इन क्षमताओं पर बल देता हे और कहता है कि और तुम सब उनके मुक़ाबले के लिए संभावित शक्ति और घोड़ों की लाइनों का प्रबंध करो जिससे अल्लाह के दुश्मन, अपने दुश्मन और उनके अतिरिक्त जिनको तुम नहीं जानते हो और अल्लाह जानता है, सबको भयभीत कर दो और जो कुछ ही ईश्वर के मार्ग में ख़र्च करोगे सब पूरा पूरा मिलेगा और तुम पर किसी प्रकार का अत्याचार नहीं किया जाएगा।

जैसा कि आप जानते हैं कि आज की दुनिया में एक राष्ट्र की शक्ति, किसी सीमा तक उसकी आर्थिक और तकनीकी शक्ति पर आधारित होती है और अधिकतर अवसरों पर अपने सैन्य युद्ध के बजाए आर्थिक, सांस्कृतिक और मीडिया युद्ध छेड़ देते हैं। इस आधार पर दुश्मनों के मुक़ाबले में अपनी समस्त क्षमताओं को प्रयोग करना और पूरी तरह से तैयार रहने पर आधारित ईश्वर के आदेश के व्यवहारिक होने के लिए आर्थिक विकास और तकनीक में प्रगति की आवश्यकता है जो उत्पादन के क्षेत्र में भी विशेष रूप से ध्यान देता है। इसीलिए यह कहा जाता है कि वैश्विक स्तर पर आवश्यकता की वस्तुओं के उत्पादन और सेवाओं में आत्म निर्भरता और शक्ति की मंज़िल तक पहुंचना, अर्थव्यवस्था के मूल लक्ष्यों में शुमार होता है।

पिछले चालीस वर्षों के दौरान ईरान की इस्लामी क्रांति को हमेशा से ही दुश्मनों के षड्यंत्रों का सामना रहा है जिसके अंतर्गत व्यापक प्रतिबंधों, नर्म युद्ध और सांस्कृतिक युद्ध जैसे ईरान पर आर्थिक दबाव डाले गये। यहां पर यह भी बताना ज़रूरी है कि ईरान की आर्थिक व्यवस्था को तबाह करने के लिए आठ वर्षीय थका देने वाला युद्ध भी शुरु किया गया। इन सब मामलों में ईश्वर की कृपा से इस्लामी क्रांति की सफलता से लेकर पिछले चालीस वर्षों के दौरान तक ईरानी राष्ट्र ने विभिन्न आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मूलभूत परिवर्तन किए और इन वर्षों के दौरान क्रांति के कारनामे को पेश किया।

ईरान के एक प्रसिद्ध टीकाकार राजी का कहना है कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने दूसरे क़दम के अंतर्गत जो सबसे अहम चीज़ क़रार दी है वह विदेशी मुद्रा में स्थिरता है।

दुश्मनों की समस्त दुश्मनियों, साज़िशों और प्रतिबंधों के बावजूद इस्लामी गणतंत्र ईरान अपने विकास और प्रगति के मार्ग को तय करता रहा और वह अब तक वरिष्ठ नेता के युक्तिपूर्ण नेतृत्व और मार्गदर्शन की बदौलत विभिन्न क्षेत्रों में ज़बरदस्त विकास कर चुका है और दुनिया में अपनी शक्ति और प्रतिरोध का लोहा मनवा चुका है और विश्ववासी भी ईरान की हिम्मत और उसके साहस की सराहना करते नहीं थकते। एक समाज के विकास और उसके जीवन में अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका के संबंध में वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पिछले दस वर्ष के दौरान वर्षों के नाम को आर्थिक मुद्दों के आधार पर रखना शुरु किया।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पिछले हिजरी शम्सी वर्ष अर्थात 1398 हिजरी शम्सी में नववर्ष के अपने बयान में देश के विकास का मुख्य मद्दा उत्पादन का मुद्दा क़रार दिया और कहा कि क्योंकि यदि उत्पादन का क्रम जारी रहेगा, तो आर्थिक और रोज़गार का मुद्दा भी हल हो जाएगा, साथ ही दुश्मनों और विदेशियों से देश भी छुटकारा पाएगा, यहां तक कि राष्ट्रीय मुद्रा की वैल्यु की समस्या को भी बहुत अधिक हद तक दूर करेगी, इस आधार पर इस साल का नाम मैं उत्पाद में रौनक़ रख रहा हूं।

इन चिंताओं के बीच इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद देश की आर्थिक चिंताओं के बावजूद देश को आरंभिक वर्षों में ही बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। क्रांति विरोधी गुटों के उपद्रवों, पश्चिम द्वारा ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध, ईरान पर इराक़ द्वारा थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध जैसी समस्याएं थीं इसके बावजूद कृषि का विभाग देश की अर्थव्यवस्था के उन मूल आधारों में से एक था जिस पर सरकार ने हमेशा ही ध्यान दिया और इस परिणाम यह निकला कि देश देश की आवश्यकता के 90 प्रतिशत कृषि उत्पाद देश में ही पैदा किए जाते हैं।

 

ईरान में क्रांति की सफलता के बाद इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने गेहूं, चावल और जौ जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के क्षेत्र में देश को आत्म निर्भर बनाए जाने की आवश्यकता पर बल की वजह से इस क्षेत्र में बहुत अधिक काम हुआ और तेज़ी से कार्यवाहियां की जाने लगी।

ईरान में 9 अलग अलग क्षेत्र है जो दुनिया के देशों से उसे अलग करते हैं। ईरान ने 25 उत्पादों में दुनिया में पहले से दसवां स्थान बना रखा है। क्षेत्रीय देशों के 85 प्रतिशत फलों की आवश्यकता, ईरान ही पूरी करता है क्योंकि ईरान के पास अच्छी क्षमता, खेत, अच्छे किसान और अच्छी संभावनाएं पायी जाती हैं।

इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद कच्चा माल कम बेचने के उद्देश्य से पेट्रोकेमिकल उद्योग में वृद्धि पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। अब सवाल यह पैदा होता है कि पेट्रोलियम उत्पाद या पेट्रोकेमिकल किसे कहते हैं। पेट्रोलियम उत्पाद, तेल रिफाइनरियों में संसाधित कच्चे तेल से प्राप्त होने वाली उपयोगी सामग्रियों को कहते हैं।

कच्चे तेल की संरचना और मांग के अनुसार रिफाइनरियां पेट्रोलियम उत्पादों को विभिन्न मात्राओं में उत्पादित कर सकती हैं। तेल उत्पादों का सबसे अधिक मात्रा में उर्जा वाहकों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पेट्रोकेमिल उत्पादों के क्षेत्र में विभिन्न रिकार्ड दर्ज किए गये हैं। ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग ने अपने मार्ग में विभिन्न चुनौतियां खड़ी किए जाने के बावजूद अपनी प्रगति और विकास का क्रम जारी रखा। 1358 हिजरी शम्सी में अनेक पेट्रोकेमिकल उत्पादों की उत्पादन क्षमता लगभग तीस लाख टन थी और अब यह संख्या बढ़कर 65.6 मिलियन बढ़ गया है।

इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद ईरान का पेट्रोकेमिकल उद्योग काम्लेक्स सक्रिय था जो अब बढ़कर 54 तक पहुंच चुका है।  पांचवें विकास कार्यक्रम के आरंभ से अब तक 1395 की समाप्ति तक पेट्रोकेमिकल के संबंध में 26 अलग अलग योजनाओं पर अमल किया गया जिसमें उत्पादन, आधारभूत ढांचे, आंशिक सेवाएं और साढ़े दस मिलियन टन के शोध और खाद्य पदार्थों का उत्पादन शामिल है। इसी प्रकार पेट्रोकेमिकल उद्योग कंपनी की ओर से जारी बयान के अनुसार इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद और पिछले 40 वर्षों के दौरान 63 पेट्रोकेमिकल यूनिट बनाए गये हैं।

 

ईरान की अर्थव्यवस्था को निखारने में इस्पात उद्योग भी है और हर देश में इस्ताप के प्रयोग के स्तर को देखते हुए उसके औद्योगिक स्थान को परखा जाता है। क्योंकि उद्योगों में इस्पात के प्रयोग का मापदंड यह दिखाता है कि विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और उद्योग किस सीमा तक सक्रिय है। ईरान की इस्पात कंपनी, पश्चिमी एशिया में इस्पात के उत्पादन की सबसे बड़ी कंपनी समझी जाती है। आयरन स्टोन का बड़ा भंडार जो अब तक लगभग 3 अरब टन तक खोजा जा चुका है वह देश के इस्पात की आवश्यकताओं को पूरा करने और कच्चा माल बेचने से रोकने में अहम भूमिका अदा कर रहा है। ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद इस्पात उद्योग के विस्तार और इसके स्थानीयकरण करण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ईरान में नजफ़ाबाद के इस्पाद उद्योग के एक विशेषज्ञ ने बताया कि वह पिछले चालीस साल से गाड़ियों के पुर्ज़े और सामान बना रहा है और देश की गाड़ियों अधिकतर आवश्यकताओं की भरपाई इसी कारख़ाने से होती है।

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद गाड़ी उद्योग ने भी ज़बरदस्त सफलताएं अर्जित की हैं। वर्तमान समय में दुनिया के 195 देशों में से केवल 55 देश ही गाड़ी उद्योग में प्रगति कर सके हैं। वाहन उद्योग से संपन्न इन  55 देशों में से केवल 20 देश ही हैं जो प्रतिवर्ष दस लाख से अधिक गाड़ियों का उत्पादन करते हैं और ईरान ने 1396 हिजरी शम्सी में 20 लाख गाड़ियों का उत्पादन करके दुनिया में अपना सोलहवां स्थान बना लिया। यहां पर एक बात का उल्लेख आवश्यक है कि ईरान की गाड़ियां, इराक़, सीरिया और बेलारूस सहित दुनिया के अनेक देशों में निर्यात की जाती हैं और उनका इन देशों में बहुत अधिक स्वागत भी किया जाता है।

ईरान में गाड़ी उद्योग, तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उद्योग के बाद देश का तीसरा बड़ा उद्योग है जो देश के दस प्रतिशत सकल घरेलू उत्पादन में भागीदार है और देश के 4 प्रतिशत लोगों अर्थात सात लाख लोगों को रोज़गार दे रहा है। देश के वाहन उद्योग ने नवीन तकनीकों का प्रयोग करते हुए विशेषकर नैनो टेक्नालाजी का प्रयोग करते हुए आधुनिक और ज़बरदस्त गाड़ियां बनाई हैं और यह क्रम यथावत पूरी शक्ति के साथ जारी है। ईरान में बनने वाली अनेक प्रकार की गाड़ियों के पूरे सामान और कलपुर्ज़े इन्हीं कारख़ानों और उद्योगों से पूरे किए जाते हैं।

इस्लामी गणतंत्र ईरान दुनिया के 11 देशों में है जिनके पास उपग्रह प्रक्षेपण की तकनीक है। ईरान इसी प्रकार अंतरिक्ष में जीवित प्राणी को भेजने वाला दुनिया का छठा देश बन गया है। इसी प्रकार परमाणु उद्योग में जो दुनिया के देशों की ऊर्जा का भविष्य है, ईरान दुनिया में चौदहवें स्थान पर है और इस चिकित्सा, कृषि और उद्योग के क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा का प्रयोग करके अद्वितीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। (AK)

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