Feb १०, २०२० १७:२६ Asia/Kolkata

आज के दिन ईरान में इस्लामी क्रांति सफल हुई और जीत के  नारों से ईरान का कोना कोना गूंज उठा।

प्रकाश का ऐसा विस्फोट हुआ कि शाही अंधकार मिटते चले गये और हजा़रों शहीदों के रक्त की आहुति के बाद अन्ततः ईरान में एक ऐसी क्रांति सफल हुई जिस का उदाहरण अतीत में नहीं मिलता आज के दिन ईरान के क्रांतिकारी युवाओं ने सैनिक छावनियों पर आक्रमण किये और सड़कों पर लड़ाई के बाद शाही सेना ने घुटने टेक दिये । इस महान एतिहासिक घटना के बाद , अत्याचार व शोषण के चंगुल से छुटकारा पाने वाली ईरानी जनता ने खुशियां मनाना आरंभ कर दी ।

 

आज ही के दिन क्रांतिकारियों ने शाही सेना के कई जनरलों को गिरफतार कर लिया और आयुद्य भंडार , संसद , प्रधानमंत्रा भवन , पुलिस मुख्यालय और रेडियो व टीवी स्टेशनों पर क्रांतिकारी जनता का अधिकार हो गया इसी के साथ तेहरान- करज राजमार्ग को भी बंद कर दिया गया ताकि शाही सेना तेहरान में प्रवेश न कर सके। इस प्रकार से ईरान में शाही शासन का पतन हो गया और ईरान के इतिहास में पहली बार इस्लामी आधारों पर एक सरकार का गठन हुआ और यह सब कुछ क्रांति के महान नेता , इमाम खुमैनी के अथक परिश्रम व सूझबूझ से संभव हुआ था। ईरान में एक अभूत पूर्व घटना घट चुकी थी। एक ऐसा तूफान उठ चुका था जिस का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ने वाला था। क्रांति की सफलता की 41 वीं वर्षगांठ समस्त स्वतंत्रता प्रेमियों को मुबारक हो ।

 

ईरान की इस्लामी क्रांति के क्षेत्रा व विश्व स्तर पर व्यापक प्रभाव सामने आये किंतु सब से अधिक प्रभाव शाली आयाम , इस क्रांति का धर्म पर आधारित होना था। दुनिया में यह एक नया संदेश था क्योंकि इस संदेश  दुनिया की महाशक्तियों को नकार कर ईश्वर की शक्ति पर भरोसा जताया गया था। राजनीतिक टीकाकार हामिल अलखलीफा कहते हैं। ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता बीसवी सदी की सब से बड़ी घटना है। ईरान की इस्लामी क्रांति ने बहुत से देशों और राष्ट्रों पर प्रभाव डाला और दुनिया भर में चल रहे स्वतंत्रता प्रेमी आंदोलनों के सामने नये मार्ग खोले। 

 

बी बी सी टीवी चैनल ने दूसरी शताब्दी नामक अपनी एक डाक्यूमेंट्री में इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि : सन 1979 में जो कुछ ईरान में हुआ वह केवल ईरानियों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के समस्त धर्मों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ था जहां से हज़ारों लोग धर्म की ओर मुड़ गये , इस चैनल के अनुसार , पूरे विश्व में , ईसाई , यहूदी और अन्य धर्मों के अनुयायी , धार्मिक रुढ़िवाद की ओर आकृष्ट हो गये यहां तक कि तुर्की में भी , जहां उसी समय धर्म विरोधी आंदोलन का आरंभ हुआ था , इस्लामी रुढ़िवाद की ओर वापसी की प्रक्रिया में तीव्रता आई ।

इसी प्रकार अमरीका विदेश नीति समिति के प्रमुख डेनियल पाइपस ने तुर्की के इस्तांबूल नगर में आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि ईरान में इस्लामी क्रांति से पूर्व हम ने धार्मिक विचारों को कोई महत्व नहीं दिया था किंतु उस के पश्चात हम अमरीकियों के लिए आवश्यक है कि धर्म के बारे में अध्ययन की भूमिका प्रशस्त करें।

ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता से साम्राज्यवादी शक्तियां किस तरह से बोखला गयी थीं और कैसे उसे खत्म करने की योजना बना रही थीं इसका अदांज़ा अमरीका के विभिन्न अधिकारियों के बयानों से लगाया जा सकता है।  अमरीकी विदेशमंत्रालय में पश्चिमी एशिया डेस्क के प्रभारी मार्टिन एन्डाइक कहते हैं कि ईरान की इस्लामी क्रांति को दंडित करना निश्चित रूप से उन देशों के लिए सबक़ होगा जो अमरीकी वर्चस्व से छुटकारे की दिशा में बढ़ रहे हैं। अमरीकी अधिकारी और अमरीकी सरकार आज तक  ईरान की इस्लामी क्रांति को दंडित करने के प्रयास में पूरे ईरानी राष्ट्र को दंड दे रही है क्योंकि उन्होंने अपने देश में क्रांति को सफल किया लेकिन अमरीका द्वारा सभी रुकावटों के बावजूद क्रांति सफल हुई और सफलता के साथ 41 वीं वर्षगांठ मना रही है। 

ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता से पूर्व , भौतिकवाद पर आधरित विचारों की सफलता व लोकप्रियता इस प्रकार से निश्चित नज़र आ रही थी कि 18 वीं शताब्दी के बहुत से प्रसिद्ध दार्शनिक , भविष्य में धर्म की भूमिका को पूर्ण रूप से ख़ारिज कर चुके थे , इसी प्रकार 19 वीं शताब्दी में भी ऐसे विचार सामने आए जिन में या तो मार्क्सवाद की भांति पूर्ण रूप से धर्म का इन्कार किया गया था या फिर इस्लाम जैसे धर्मों का स्थान , गढ़े हुए धर्मों ने ले लिया था किंतु आज राजनीतिक व समाजिक विश्लेषक व टीकाकार , समाज में धर्म की भूमिका और प्रभाव से इन्कार का साहस नहीं करते बल्कि उन के विचारों में पूर्ण रूप से बदलाव आता दिखाई दे रहा है और अब साफ तौर पर वे कहते हैं कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय शक्ति के खेल को  समझना , इस्लाम , कैथोलिक तथा अन्य धर्मों की दिन प्रतिदिन बढ़ती शक्ति पर ध्यान दिये बिना सभंव नहीं है। 

 

 ईरान की इस्लामी क्रांति को जो वास्तव में मानव जीवन में नये युग का आंरभ है , वर्तमान युग में मनुष्यों में आध्यात्मिक बोध का आंरभ बिंदु कहा जाता है । बहुत से बुद्धिजीवियों का मानना है कि वर्तमान युग के समाजों में धार्मिक व आध्यात्मिक जीवन का आरंभ , ईरान की इस्लामी क्रांति से हुआ इसी लिए यह कहना चाहिए कि यदि हम वर्तमान युग में धार्मिक बोध के नवजीवन के लिए किसी तिथि का निर्धारण करना चाहें तो वह वर्ष 1979 है जब ईरान में इस्लामी क्रांति सफल हुई और जिस से समस्त धर्मों में धार्मिक विचारों का उफान आ गया। यही ईरान की इस्लामी क्रांति का सब से बड़ा चमत्कार है।

 

इमाम खुमैनी ने वास्तव में धर्म की शक्ति से विश्व को परिचित कराया और यह सिद्ध कर दिया कि ईश्वर द्वारा संकलित नियमों व शिक्षाओं पर आधारित धर्म मानव जीवन के समस्त आयामों के लिए किसी भी अन्य , विचारधार व दृष्टिकोण से अधिक उपयोगी व प्रभावी है। आंकड़े इस बात के साक्षी हैं कि ईरान में इस्लाम क्रांति की सफलता के पश्चात पूरे विश्व में धर्म की ओर रुझान बढ़ा है विशेषकर युरोप और अमरीका में अध्ययनों में पाया गया कि गिरिजाघरों और धार्मिक स्थलों में लोगों की भीड़ में वृद्धि हुई है। ईरान की इस्लामी क्रांति ने लोगों में इस बात का बोध उत्पन्न किया कि धर्म केवल मंदिर मस्जिद या गिरिजाघरों तक ही सीमित नहीं होता बल्कि पश्चिम के इस नारे के विपरीत कि धर्म व राजनीति में कोई संबंध नहीं है , ईरान की इस्लामी क्रांति ने सिद्ध कर दिया कि यदि मानव समाज को सही दिशा में आगे ले जाना है और यदि समाज को विभिन्न प्रकार की समस्याओं से सुरक्षित रखते हुए कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करना है तो उस के लिए ऐसी व्यवस्था का होना आवश्यक है जो व्यापक व सर्वकालिक हो तथा जिसे ऐसी किसी हस्ती ने बनाया हो जो मानव समाज और मनुष्य की प्रत्येक आवश्यकताओं से पूर्ण रूप से अवगत हो और यह केवल धर्म द्वारा ही संभव है जिसे ईश्वर ने मनुष्य के लिए संकलित किया है।

 

ईरान की इस्लामी क्रांति ने विश्व वासियों को इस वास्तविकता से न केवल परिचित कराया बल्कि व्यवहारिक रूप से इसे सिद्ध भी किया और आज ईरान की इस्लामी क्रांति  की 41 वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह बात पूर्ण रूप से सिद्ध हो चुकी है कि पूरब व पश्चिम के ब्लॉकों पर भरोसा किये बिना और विश्व की महाशक्तियों से विमुख होकर धर्म और ईश्वर पर विश्वास के सहारे मनुष्य अपने संकल्प की सीढ़ियों  से कैसी-कैसी चोटियों तक पहुंचा सकता है हालांकि इस राह में ईरानी राष्ट्र को बहुत सी रुकावटों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन ईरानी राष्ट्र अटल और अजेय रहा। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई कहते हैं कि ईरानी राष्ट्र के अटल व अजेय होने का उदाहरण, इस्लामी क्रांति की सफलता की प्रक्रिया, ईरान पर थोपे गये युद्ध के दौरान रक्षा और हालिया 40 वर्षों के दौरान की जाने वाली साज़िशों का मुक़ाबले करने के रूप में देखा जा सकता है। 

 

ईरानी जनता ने इमाम खुमैनी के नेतृत्व में धर्म की उस शक्ति से विश्व वासियों को परिचित कराया जिस से बहुत से लोग या तो परिचित नहीं थे या फिर उन्हें उस की इस शक्ति पर विश्वास नहीं था। इमाम खुमैनी ने ईश्वर के आदेशों का पालन करने हुए ईश्वर के बनाए हुए धर्म के बल पर महाशक्तियों को कुछ इस प्रकार से धूल चटाई कि उस की कड़वाहट आज भी उन की जीभ पर है और इसी लिए अभी तक उन की ज़बान इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध ज़हर उगल रही है किंतु जो शक्ति के अनन्त स्रोत अथार्त ईश्वर से जुड़ा होत है उसे संसार की महाशक्तियों का कोई भय नहीं होता अतीत में ईरान की इस्लामी क्रांति के दौरान इमाम खुमैनी के नेतृत्व में ईरानी जनता ने इस वास्तविकता को सिद्ध किया और आज इमाम खुमैनी के महाआदोलन से प्रेरणा लेकर बनने वाला प्रतिरोध मोर्चा क़दम क़दम पर साम्राज्यवादी शक्तियों को धूल चटा कर और इराक़ व सीरिया से उन्हें खदेड़ कर इस वास्तविकता को सिद्ध कर रहा है।  

 

 ईरान की इस्लामी क्रांति का इतिहास जानने वालों का ज्ञात है कि ईरानी राष्ट्र को महाशक्तियों  और उन के हथियारों से धमकाना संभव नहीं है यदि ऐसा होता तो 11 फरवरी 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति , अमरीका व ब्रिटेन  व फ्रांस जैसी शक्तियों की रणनीतियों , उपायों और धमकियों का रौंदते हुए सफलता की चोटी पर न पहुॅुचती  ईरान की इस्लामी क्रांति सफल हुयी और ईरानी राष्ट्र आज उस की सफलता की 41 वीं वर्षगांठ मना रहा है और सैंकड़ों वर्षों तक मनाता रहेगा। अमरीका ने तरह तरह की साज़िशें करने के बाद साफ्ट वॅार का सहारा लिया है लेकिन उसमें भी उसे अब तक सफलता नहीं मिली है और ईरान की इस्लामी क्रांति विकास व ताक़त के मार्ग में अमरीका के वर्तमान शासकों के काल में भी जारी रहेगी।  इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई कहते हैं  कि इस्लामी गणतंत्र ईरान को मैदान से बाहर करने या कमज़ोर करने की हसरत, अमरीका के वर्तमान शासकों के दिलों में भी रह जाएगी। Q.A.

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