Mar २३, २०२० ०३:४७ Asia/Kolkata
  • ईरानी नववर्ष या नौरोज़ के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम- 3

सुन्दरता का पूरा जलवा लिए बहार दोबारा आ गयी है और वह अपने साथ खुशी और समरसता को साथ लेकर आयी है।

बसंतऋतु की खुशी सार्वजनिक होती है, हर ओर खुशी का माहौल है, नये वर्ष के शुभ आरंभ के लिए सभी एक दिल हो जाते हैं। बहार लोगों में खुशी, स्फूर्ति और शांति भर देती है और बहार प्रकृति की खुशी में इंसान को अपने साथ कर लेती है। इंसान ब्रह्मांड की सुन्दरता के जलवों के बारे में चिंतन- मनन करता है और महान व सर्वसमर्थ ईश्वर के अस्तित्व को और बेहतर ढंग से समझता है। जैसाकि स्वयं महान ईश्वर ने पवित्र कुरआन के सूरे आले इमरान की आयत नंबर 190 में कहा है कि बेशक आसमान और ज़मीन की सृष्टि और रात-दिन के होने में बुद्धिमानों के लिए निशानियां हैं।

बसंत इंसान के मार्गदर्शन और उसकी प्रशिक्षा के लिए महान ईश्वर की निशानी और उसका उपहार है। बहार सोई हुई प्रकृति और निश्चेत इंसान में चेतना की नई जान डाल देती है। आइये हम भी प्रकृति के इस बदलाव से स्वयं को समन्वित करें और पवित्र व शुद्ध दिल के साथ और महान ईश्वर का सामिप्य प्राप्त करने के शौक के साथ अपनी आत्मा को परिवर्तित करें और नौरोज़ की ईद में पढ़े जाने वाले वाले इन प्रिसद्ध वाक्यों को दोहराते हैं या मुक़ल्लेबल क़ुलूब वल अबसार

हे दिलों और नेत्रों को परिवर्तित करने वाले ईश्वर, हे रात और दिन को परिवर्तित करने वाले ईश्वर, हे साल को बदलने वाले, हमारे हाल को बेहतरीन हाल में परिवर्ति कर दे।

नौरोज़ परिवर्तन व बदलाव का पर्व है। प्रकृति में बदलाव प्रलय के दिन की याद दिलाता है। यह बहार और प्रकृति में बदलाव, पापों से प्रायश्चित करने और अच्छा फैसला लेने का अवसर है। प्रकृति के जीवित होने को देखकर प्रलय के दिन ज़िन्दा होने और महान ईश्वर की बारगाह में हाज़िर होने की याद आ जाती है। जो लोग यह सोचते हैं कि मरने के बाद इंसान कैसे ज़िन्दा होगा तो इस प्रकार की सोच रखने वालों के जवाब में महान ईश्वर सूरे यासिन की आयत नंबर 79 में कहता है” हमारे लिए मिसाल बयान की और सृष्टि व रचना को भूल गया, उसने कहा कि इन हड्डियों को कौन ज़िन्दा करेगा जबकि यह गल गयी हैं हे रसूल कह दीजिये कि इन हड्डियों को वही ज़िन्दा करेगा जिसने पहली बार इन्हें अस्तित्व प्रदान किया और वह हर प्रकार की रचना का जानकार है।

 

नया वर्ष इस बात का अवसर है कि इंसान अपने अंदर को सुधारे , उसके अंदर बदलाव होना चाहिये। परिवर्तन उत्पन्न करना महान ईश्वर का कार्य है किन्तु हमारा दायित्व है कि हम अपने अंदर परिवर्तन के लिए प्रयास करें।

इस समय हम प्रकृति में जो बदलाव देख रहे हैं उसका स्रोत महान ईश्वर है और यह उसकी असीम कृपा का एक छोटा सा नमूना है। महान ईश्वर प्रकृति में बदलाव करके इंसान को प्रलय की याद दिलाना चाहता है और यह बताना चाहता है कि जिस तरह हमने सूख कर मर चुकी प्रकृति को दोबारा जिन्दा और हरा- भरा कर दिया उसी तरह हम प्रलय के दिन समस्त इंसानों को ज़िन्दा करके दोबारा उठायेंगे और सारे उनके कर्मों का हिसाब- किताब लेंगे। जिस तरह महान ईश्वर ने प्रकृति को दोबारा जीवन प्रदान किया उसी तरह उसने इंसान को भी परिपूर्णता के शिखर पर पहुंचने के लिए दोबारा अवसर दिया है। महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे रोम की 50वीं आयत में फरमाता है” तो ईश्वर की रहमत व दया के चिन्हों को देखो कि वह किस तरह ज़मीन को मरने के बाद ज़िन्दा करता है बेशक वह मुर्दों को ज़िन्दा करेगा और वह हर कार्य करने पर पूर्ण सक्षम है।“ जी हां जिस महान ईश्वर की कृपा के समीर से मरी हुई प्रकृति दोबारा ज़िन्दा हो जाती है उसी तरह इंसान के मरे हुए दिल भी महान ईश्वर की कृपा से दोबारा जीवित हो जाते हैं। अलबत्ता इस शर्त के साथ कि प्रकृति की भांति इंसान भी स्वयं को महान ईश्वर की दया का पात्र बनाये।

 

वास्तव में प्रकृति एक अवसर है ताकि इंसान अपनी उम्र के उस हिस्से के बारे में चिंतन- मनन करे जो गुज़र चुका है और वह यह सोचे कि उसे फिर से सोचने और स्यवं को इंसान बनाने का अवसर दिया गया है। इस अवसर को उसे महान ईश्वर की ओर से दिया गया वरदान समझना चाहिये। इंसान को चाहिये कि वह अचेतना की नींद से जागे और प्रदान किये गये अवसर की कीमत समझे। महान व सर्वसमर्थ ईश्वर प्रकृति को मार कर और उसे दोबारा ज़िन्दा करके मारने और ज़िन्दा करने में अपनी शक्ति को दिखाना चाहता है। इंसान को सोचना व समझना चाहिये कि जो ईश्वर पूरी प्रकृति को मार कर उसे दोबारा ज़िन्दा करता है वही ईश्वर प्रलय के दिन समस्त इंसानों को जीवित करेगा। यही नहीं इंसान यह न सोचे कि एसा कैसे होगा बल्कि महान ईश्वर पवित्र कुरआन में यह कह रहा है कि इंसान यह सोचता है कि हम उसकी हड्डियों को एकत्रित नहीं कर पायेंगे, हम तो इंसानों की उंगलियों की पोर को भी वैसे बना देंगे जैसे वे थीं।

पवित्र कुरआन की शिक्षाओं के अनुसार इंसान को इस नश्वर संसार के लिए नहीं पैदा किया गया है। उसे इस दुनिया में महान ईश्वर की उपासना के लिए पैदा किया गया है ताकि वह परिपूर्णता के चरण को तय करे और अपने सुकर्मों से परलोक प्राप्त करे जहां वह सदैव रहेगा और वहां पर उसे कभी भी मौत नहीं आयेगी। पैग़म्बरे इस्लाम के एक कथन में इस दुनिया को परलोक की खेती बताया गया है। यानी यह दुनिया कर्म भूमि है और इंसान यहां पर जो करेगा वही उसे परलोक में दिया जायेगा यानी इस लोक में जो बोयेगा वही परलोक में काटेगा। बहरहाल इंसान को परलोक के पवित्र, अच्छे और अमर जीवन को प्राप्त करने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिये।

इस नश्वर संसार का जो जीवन है उसमें इंसान और जानवर दोनों समान हैं। उसी तरह इंसानों और फरिश्तों के जीवन के मध्य भी कुछ समानताएं हैं और पवित्र कुरआन बल देकर कह रहा है कि इंसान को चाहिये कि उसका जीवन फरिश्तों की तरह हो जाये बल्कि उनसे भी अच्छा व श्रेष्ठ हो जाये। महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे अनफाल की 24वीं आयत में ईमान वालों को संबोधित करते हुए फरमाता है” हे ईमान लाने वालों अल्लाह और उसके रसूल के निमंत्रण का जवाब दो जब वे तुम्हें बुलायें और जान लो कि इंसान और उसके दिल के मध्य ईश्वर दीवार बन जाता है और प्रलय के दिन सबको उसके सामने एकत्रित किया जायेगा।

 

जी हां महान ईश्वर और पैग़म्बरे इस्लाम लोगों को सदैव बाकी रहने वाले अमर जीवन की ओर आमंत्रित कर रहे हैं। क्योंकि वे हमें ज़िन्दा करना चाहते हैं। वास्तव में महान ईश्वर ने जिन लोगों को संबोधित किया है वास्तव में वे ज़िन्दा रहने वाले हैं। इस बात के दृष्टिगत इंसान और हैवान के जीवन में समानता नहीं है यानी वास्तविक व महान ईश्वर को मानने वाला इंसान सदैव रहेगा। हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि इंसान एसा प्राणी है जो ईश्वर की प्रशंसा और उसका गुणगान करता है। इस आधार पर जिस बहार को महान ईश्वर ने अपनी असीम कृपा व दया से हमें उपहार स्वरूप प्रदान किया है हमें चाहिये कि दिल, ज़बान और अपने पूरे अस्तित्व से उसका शुक्र अदा करें, प्रकृति के ज़िन्दा किये जाने को देखकर हम प्रलय को याद करें। अगर हमने इस अवसर की क़ीमत नहीं समझी और हम अपने नेत्रों को इन चीज़ों से बंद कर लें तो हम न केवल हैवान नहीं हैं बल्कि हैवान व जानवर से भी अधिक तुच्छ व गुमराह हैं जैसाकि महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे आराफ़ की आयत नंबर 179 में कहता है कि उनके पास एसे दिल हैं जिनसे वह सच्चाई को नहीं समझते हैं और उनके पास एसे नेत्र भी हैं जिनसे उन्हें दिखाई नहीं देता है और उनके पास एसे कान भी हैं जिनसे उन्हें सुनाई नहीं देता है एसे लोग जानवर समान है बल्कि जानवर से भी बदतर हैं और एसे निश्चेत लोग हैं।

दोस्तो कार्यक्रम की समाप्ति और नये साल के आरंभ होने पर आप सबकी सेवा में एक बार फिर हार्दिक बधाई पेश करते हैं और आप सबके लिए शुभ वर्ष की कामना करते हैं और आशा है कि महान ईश्वर हम सब पर अपनी कृपा करेगा कि हम सब अपने अंदर बदलाव करके वह स्थान प्राप्त कर लें जो महान ईश्वर और उसके पैग़म्बर हमसे चाहते हैं और स्वयं को महान ईश्वर के निकट करें।

 

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