Mar २४, २०२० १३:३८ Asia/Kolkata
  • ईरानी नववर्ष या नौरोज़ के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम- 4

ईरानियों में जो परम्परायें प्रचलित हैं उनमें से एक दस्तरख़ान है और उसमें दूसरों को खाना खिलाया जाता है जिसे ईरानी सुफरये ताम, सुफरये नज़्री, सुफरये मेहमानी, सुफरये ज़ियारती, सुफरये इफ्तारी, सुफरये शादी, सुफरये इमाम हसन आदि के नाम से जाना है।

इस प्रकार का जो दस्तरख़ान होता है उसमें लोगों को आमंत्रित किया जाता है और लोग सामूहिक रूप में भोजन करते हैं और वह लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करता है और लोगों का एक दूसरे से जुड़ना समाज की बहुत सी कठिनाइयों के समाधान का कारण बनता है। जब इस प्रकार का दस्तरखान होता है तो उसमें पूरे परिवार के सदस्य लगते हैं और लोग़ों के खाने- पीने की लगभग समस्त ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाता है।

जब ईरानी दस्तरखान लगाते हैं तो उसमें बहुत सी चीज़ों को ध्यान में रखा जाता है। जैसे दस्तरखान के आरंभिक भाग में मेहमानों को बैठाया जाता है जो उनके प्रति आदर- भाव और सम्मान का सूचक होता है और जो मेज़बान होता है वह विनम्रता स्वरूप दस्तरखान के अंत में बैठता है और सबसे अंत में वह खाना खाने से हाथ रोकता है। उसकी वजह यह है कि अगर वह खाना खाने में पहले हाथ रोक लेगा तो दूसरे मेहमान खाना खाने में शर्म का आभास करेंगे और वह शायद पेट भर कर खाना न खायें इसलिए वह सबसे अंत में खाना खाने से हाथ रोकता है।

दस्तरखान के जो शिष्टाचार होते हैं ईरानी उस पर बहुत ध्यान देते हैं और अगर कोई इन शिष्टाचारों पर ध्यान नहीं देता है तो उसकी आलोचना की जाती है।   

 

दोस्तो जैसाकि आप जानते हैं कि नया ईरानी वर्ष आरंभ होने वाला है। इस अवसर पर ईरानी बहुत कार्यक्रम करते हैं। हर तरफ खुशी का माहौल होता है। लोग नया कपड़ा धारण करते हैं। सुगंध लगाते हैं, नया वर्ष आरंभ होने के अवसर पर ईरानी जो बहुत सारे कार्य करते हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण “सुफरये हफ्त सीन” नाम का विशेष दस्तरख़ान होता है। “हफ़्त सीन दस्तरख़ान” पर विभिन्न चीज़ें रखी जाती हैं। यहां हम आपको यह बताना चाहते हैं कि “हफ़्त सीन दस्तरख़ान” के नामकरण की वजह क्या है। इसे सुफरये हफ्त सीन या हफ्त सीन दस्तरख़ान क्यों कहा जाता है। इसकी सबसे मुख्य वजह यह है कि इस दस्तरख़ान पर एसी सात चीज़ें रखी जाती हैं जिनका आरंभ स अक्षर से होता है। जैसे सेब, सिरका, समनू गेहूं से बनने वाला विशेष प्रकार का हलुवा, सेन्जेद, सोमाग़, सब्ज़ा गेंहू आदि से उगाई जाने वाली हरियाली, सीर यानी लहसुन। सिक्का।

इसी प्रकार “हफ़्त सीन दस्तरख़ान” पर पवित्र कुरआन ज़रूर रखा जाता है, आइना, लाल रंग की छोटी छोटी मछलियां मिठाइयां, फल, गुलाब जल, सात दानों को मिलाकर पकाई गयी रोटी, खजूर, पनीर, शकर, अनार की एक शाख, ज़ैतून, बेर और अंजीर आदि भी रखे जाते हैं। कहा जाता है कि ईरानी इस्लाम से पहले से हफ़्त सीन दस्तरख़ान बिछाते व लगाते थे और हख़ामनी काल में ईरानी सात सीनियों में अलग- अलग खाने चुनकर लगाते थे जिसकी वजह से इसे हफ्त चीन भी कहा जाता था।

कुछ किताबों में यह भी कहा गया है कि जिसे हम सुफरये हफ्त सीन के नाम से जानते हैं असल में उसका नाम हफ्त शीन था और इस्लाम से पहले हफ्त शीन दस्तरखान पर सात वह चीज़ें रखी जाती थीं जिनका नाम श अक्षर से आरंभ होता है। जैसे शमअ, शहद, शमशाद, शरबत, शकाएक और शराब। पर जब ईरान में इस्लाम आ गया तो यहां के लोगों ने शराब के स्थान पर सिर्का रखना आरंभ कर दिया। इस प्रकार हफ्त शीन दस्तरखान का नाम बदलकर हफ्त सीन हो गया।

 

प्राचीन ईरान में सात की गिनती पवित्र मानी जाती थी और उसका प्रयोग ईरानी शुभ के रूप में करते थे। सात की गिनती का पवित्र कुरआन में भी उल्लेख किया गया है और मुसलमानों के निकट उसका विशेष महत्व है और पवित्र कुरआन की कुछ आयतों और सूरों में भी सात अदद का नाम लिया गया है। उदाहरण के तौर पर हज सात चरणों में है और आरंभ में पवित्र कुरआन के कारी भी सात थे।

यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि नया साल परिवर्तित होने के अवसर पर मुसलमान पवित्र कुरआन को जबकि पारसी अपनी पवित्र किताब अविस्ता और यहूदी तौरात को सुफरे हफ्त सीन पर रखते हैं। जिन चीज़ों को सुफरये हफ्त सीन पर रखा जाता है उनमें अंडा भी है और लाल रंग की छोटी मछली को उस वक्त तक रखा जाता है जब तक कि वह मर न जाये। इसी प्रकार प्राचीन समय में ईरानी प्रेम के प्रतीक के रूप में अनार और लाल सेब “सुफरे हफ्त सीन” पर रखते थे और अब भी उसे रखा जाता है।

 

आज कल “सुफरे हफ्त सीन” को ज़मीन या मेज़ पर बिछाया जाता है और परिवार के सारे सदस्य उसके पास एकत्रित होते हैं और साल के परिवर्तित होने के समय सब दुआ करते और मंगलमय वर्ष की कामना करते हैं और कुछ लोग नौरोज़ के ईद के दिन तक और कुछ लोग “सुफरये हफ्त सीन” नामक दस्तरख़ान को फरवरदीन महीने की 13 तारीख तक सुरक्षित रखते हैं और इस दस्तरखान पर जो हरयाली उगाये होते हैं उसे प्रकृति दिवस के अवसर पर पानी में बहा देते हैं। “सुफरये हफ्त सीन” पर ईरानी जो हरियाली उगाते हैं वह दिलों की प्रफुल्लता का सूचक होती है। ईरानी नया साल आरंभ होने से पहले गेहूं या दाल को उगाते हैं और कुछ बाहर से तैयार हरियाली को ख़रीद लेते हैं। प्राचीन ईरान में परम्परा थी कि नया वर्ष आरंभ होने से 25 दिन पहले बादशाहों के महलों के पास 12 अलग- अलग भागों में दाने बाये जाते थे और अगर दाना अच्छी तरह उगता था तो आने वाले वर्ष को अच्छा वर्ष माना जाता था।

इसी तरह “सुफरये हफ्त सीन” पर ईरानी सेब भी रखते हैं। वह स्वास्थ्य और खुबसूरती का परिचायक होता है। इसीलिए ईरानी अपने और अपने परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए इस दस्तरखान पर सेब भी रखते हैं।

इसी प्रकार ईरानी “सुफरये हफ्त सीन” पर अंकुरित गेहूं का हलवा बनाकर रखते हैं और वह भोजन के पौष्टिक होने का सूचक होता है।

जो चीज़ें “सुफरये हफ्त सीन” पर रखी जाती हैं उनमें से एक सेन्जिद यानी बेर है। और यह सुगंध एवं प्रेम का प्रतीक है। कुछ लोगों का कहना है कि सेन्जिद को अस्ल में संजीदा शब्द से लिए गया है जिसका अर्थ संतुलित होता है। वह इस बात का सूचक होता है कि हमें अपने जीवन और नये वर्ष में संतुलित रास्ता अपनाना और बुद्धि से काम लेना चाहिये। “सुफरये हफ्त सीन” पर जो लहसुन रखा जाता है वह पर्यावरण को विषाणुरहित बनाने और शरीर के स्वास्थ्य का सूचक होता है। इसी प्रकार “सुफरये हफ्त सीन” पर जो सिर्का रखा जाता है वह भी पर्यावरण को पवित्र बनाने और जादू से सुरक्षित रखने का सूचक होता है। सोमाक़ भी उन चीज़ों में से है जिन्हें “सुफरये हफ्त सीन” पर रखा जाता है और वह प्रेम और दिलों को जोड़ने का सूचक है। इसी प्रकार इस दस्तरखान पर जो सिक्का रखा जाता है वह बरकत का चिन्ह होता है। इसी प्रकार जो अंडा रखा जाता है वह पैदाइश व सृष्टि और इसी प्रकार दर्पण पारदर्शिता, और पानी और मछली जीवन में बरकत के सूचक होते हैं।

“सुफरये हफ्त सीन” के दोनों कोनों पर चेराग़ रखा जाता है और उसे गर्मी और प्रकाश के सूचक के रूप में रखा जाता है।

 

टैग्स

कमेंट्स