May १६, २०२० १८:२३ Asia/Kolkata

महान ईश्वर रमज़ान महीने सहित विभिन्न अवसरों के बहाने बंदों के पापों को क्षमा करने की भूमि प्रशस्त करता है।

इंसान नमाज़ पढ़कर, रोज़ा रखकर, पवित्र क़ुरआन की तिलावत करके, ज़रूरतमंदों की मदद करके और सगे-संबंधियों के साथ भलाई और अच्छा कार्य करके स्वयं को स्वर्ग में जाने का पात्र बना लेता है। इस आधार पर जो लोग अच्छा कार्य करते हैं वास्तव में वे स्वर्ग में दाख़िल होने की भूमि प्रशस्त करते हैं। महान व सर्वसमर्थ ईश्वर ने पवित्र क़ुरआन में जो शुभ सूचनाएं दी हैं उनमें से एक यह है कि जो लोग महान ईश्वर की अवज्ञा करने से परहेज़ करेंगे उन्हें वह स्वर्ग में दाख़िल करेगा और वहां वे हमेशा-हमेशा रहेंगे और जो भी स्वर्ग में दाख़िल हो गया उसे कभी भी मौत नहीं आयेगी।

स्वर्ग एक ऐसी जगह है जिसके बारे में लगभग अधिकांश धर्मों में बात की गयी है। इस्लाम धर्म की शिक्षाओं के अनुसार स्वर्ग अच्छे लोगों की जगह है और स्वर्ग में जो इंसान भी दाख़िल होगा उसे अपने भले कार्यों के हिसाब से अनुकंपायें दी जायेंगी। पवित्र क़ुरआन कहता है कि स्वर्ग अच्छे और इस दुनिया में सफल जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के रहने की जगह है। पवित्र क़ुरआन के अनुसार प्रलय के दिन हर इंसान के कर्म तौले जायेंगे और जिनके अच्छे कार्य अनुचित व ग़लत कार्यों से अधिक होंगे वे स्वर्ग में जायेंगे और वे स्वर्ग के बाग़ों में रहेंगे जिसके नीचे नहरें बह रही होंगी। स्वर्ग में जाने वालों को हूरें अर्थात अप्सरायें दी जायेंगी। स्वर्ग में जाने वाले हमेशा-हमेशा जवान रहेंगे। उन्हें न तो मौत आयेगी और न ही वे कभी बूढ़े होंगे। वे उसमें खायेंगे-पियेंगे पर उन्हें शौच की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। जिस प्रकार इंसान मां के पेट में खाता है परंतु उसे शौच की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

 

स्वर्ग कितना बड़ा होगा इसकी जानकारी महान ईश्वर को है और इस बारे में पवित्र क़ुरआन में आया है कि स्वर्ग की केवल चौड़ाई आसमानों और ज़मीन की भांति है। रोचक बात है कि पवित्र क़ुरआन में यह नहीं कहा गया है कि स्वर्ग की चौड़ाई आसमानों और ज़मीन के बराबर है बल्कि यह कहा गया है कि उसकी चौड़ाई आसमानों और ज़मीन की तरह है। यह इंसान को समझाने के लिए कहा गया है। स्वर्ग कितना बड़ा है इसका ज्ञान तो केवल महान ईश्वर को है। स्वर्ग में जो नेअमतें व अनुकंपायें हैं उसका उल्लेख और इसी प्रकार बुरे व अत्याचारी लोगों के अंजाम का उल्लेख पवित्र क़ुरआन की बहुत सी आयतों में हुआ है। पवित्र क़ुरआन के सूरए शूरा की 22वीं- 23वीं आयतों में हम पढ़ते हैं” उस दिन यानी प्रलय के दिन देखोगे कि अत्याचारी उन कार्यों की वजह से भयभीत हैं जो उन्होंने अंजाम दिये हैं और जो लोग ईमान लाये और अच्छे कार्य किये उनके लिए स्वर्ग में बाग़ हैं और जो कुछ वे चाहेंगे उनके पालनहार के पास मौजूद है और यह बहुत बड़ी सफलता है।“ यह वह चीज़ है जिसकी शुभ सूचना महान ईश्वर उन बंदों को देता है जो ईमान लाये और अच्छे अमल अंजाम दिये।

पवित्र क़ुरआन की यह आयतें स्पष्ट रूप से इस बात की सूचक हैं कि इंसान के कर्म प्रलय के दिन भौतिक रूप में दिखाई देंगे और उस दिन सभी लोग देखेंगे कि जो लोग प्रलय का इंकार करते थे और जो कुछ ग़लत कार्य उन्होंने अंजाम दिये हैं उसकी वजह से महान ईश्वर के प्रकोप से भयभीत हैं। वहां इंसान के पास भागने का कोई विकल्प नहीं होगा और न ही इंसान को दोबारा दुनिया में भेजा जायेगा। यद्यपि महान ईश्वर और प्रलय के दिन का इंकार करने वाले कहेंगे कि एक बार हमें दोबारा दुनिया में जाने का अवसर प्रदान किया जाये तो हम वहां अच्छे कार्य करेंगे परंतु अगर उन्हें दोबारा दुनिया में आने की अनुमति दी जायेगी तब भी वे दोबारा वही करेंगे जो इससे पहले किये हैं। पवित्र क़ुरआन के अनुसार बुरे लोगों का अंजाम नरक की दहकती आग के अलावा कुछ नहीं है। नरक वह दहकती हुई आग है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती और वह महान ईश्वर और प्रलय के दिन का इंकार करने वालों और बुरा कार्य करने वालों का बुरा ठिकाना है। उसमें जाने वाले हमेशा उसमें रहेंगे उसमें न वे मरेंगे न जीयेंगे। नरक में जाने वालों का कितना बुरा और दर्दनाक ठिकाना है। इसके विपरीत स्वर्ग में जाने वालों की कितनी अच्छी जगह है। यह बहुत बड़ी सफलता है।

 

पवित्र क़ुरआन स्वर्ग में जाने वालों के लिए दो चीज़ें ज़रूरी बताता है एक महान ईश्वर पर ईमान और दूसरे अच्छे कर्म। यानी केवल महान ईश्वर पर ईमान काफी नहीं है बल्कि स्वर्ग में जाने के लिए नेक अमल भी अंजाम देना ज़रूरी है। इसी प्रकार अगर कोई इंसान भला कार्य अंजाम देता है परंतु वह महान ईश्वर पर ईमान नहीं रखता है तो वह स्वर्ग में नहीं जायेगा। हां उसके अच्छे कर्मों का फल उसे अवश्य दिया जायेगा परंतु वह स्वर्ग में नहीं जायेगा। स्वर्ग में वही जायेगा जो महान ईश्वर पर ईमान लाये और भले कार्य अंजाम दे। यहां एक रोचक बिन्दु यह है कि महान ईश्वर पवित्र क़ुरआन के सूरए निसा की 124वीं आयत में कहता है कि नेक अमल मोमिन इंसान अंजाम दे या मोमिना औरत अंजाम दे तो उसे स्वर्ग में दाख़िल किया जायेगा। यानी मर्द-औरत में कोई अंतर नहीं है दोनों समान और बराबर हैं। महान ईश्वर ने अपने बंदों को नेक कार्य अंजाम देने का आदेश दिया है और जो लोग नेक कार्य अंजाम देते हैं महान ईश्वर उन्हें दोस्त रखता है और उन पर हमेशा कृपा दृष्टि करता व रखता है और वे जो भी कार्य करते हैं महान ईश्वर की दृष्टि से ओझल नहीं है बल्कि वह समस्त इंसानों और ग़ैर इंसानों के दिलों के भेदों को भी जानता है। महान ईश्वर ने स्वयं पवित्र क़ुरआन में कहा है कि ईश्वर हर उस चीज़ को जानता है जो तुम ज़ाहिर करते हो और जिसे ज़ाहिर नहीं करते हो। दूसरे शब्दों में महान व सर्वसमर्थ ईश्वर सर्वज्ञाता है उसे ब्रह्मांड की हर वस्तु की पूर्ण जानकारी है।

महान ईश्वर ने भला कार्य करने वाले बंदों को स्वर्ग में दाख़िल करने की शुभ सूचना दे रखी है। प्रलय के दिन हर इंसान को उसके किये का पूरा- पूरा बदला दिया जायेगा। किसी पर भी किसी प्रकार का अत्याचार नहीं किया जायेगा यहां तक कि अत्याचार करने वालों पर भी लेशमात्र भी अत्याचार नहीं किया जायेगा। उन्हें केवल उनके बुरे कर्मों का प्रतिफल दिया जायेगा। प्रलय के दिन नरक में जाने वालों का कर्मपत्र उनके बायें हाथ में दिया जायेगा जबकि स्वर्ग में जाने वालों का कर्मपत्र उनके दाहिने हाथ में दिया जायेगा। जिस इंसान का कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया जायेगा वह खुशी से चिल्लाकर कहेगा कि हे प्रलय के मैदान में मौजूद लोग देख लो कि मेरा कर्मपत्र मेरे दाहिने हाथ में दिया गया है इसे लेकर पढ़ लो। इसके बाद वह कहेगा कि मुझे विश्वास था कि प्रलय है और मेरे कर्मों का हिसाब-किताब होगा। स्वर्ग में दाख़िल होने वाला इंसान यह समझ जायेगा कि उसकी मुक्ति का राज़ महान ईश्वर और प्रलय के दिन पर ईमान और नेक काम है। जिस इंसान को इस बात का विश्वास हो कि उसके कर्मों का हिसाब-किताब होगा और बुरे कर्मों पर उसे दंडित किया जायेगा तो वह हमेशा ग़लत व बुरे कार्यों से परहेज़ करेगा। दूसरे शब्दों में जो इंसान अपने कर्मों के हिसाब-किताब का विश्वास रखता होगा वह तक़वा धारण करेगा और ग़लत कार्यों को अंजाम देने से डरेगा। स्वर्ग, बुरे कार्यों से दूरी करने वाले और अच्छे कार्यों को अंजाम देने वाले की प्रतीक्षा में है। स्वर्ग में जाने वालों से कहा जायेगा कि जो चाहो खाओ पीओ। इसी प्रकार स्वर्ग में जाने वालों से कहा जायेगा कि यह अनुकंपायें तुम्हारे उन कार्यों का बदला हैं जो तुम दुनिया में करते थे। जो लोग मुत्तक़ी होंगे यानी महान ईश्वर से डरने वाले होंगे उन्हें गिरोह-गिरोह करके स्वर्ग में ले जाया जायेगा और जब वे स्वर्ग के पास पहुंचेंगे तो स्वर्ग का दरवाज़ा खोल दिया जायेगा और स्वर्ग के दरवाज़े पर जो फरिश्ते होंगे वे उन्हें सलाम करेंगे और कहेंगे कि स्वर्ग में दाख़िल हो जाओ और यहां पर हमेशा-हमेशा रहो। इस पर स्वर्ग में जाने वाले महान ईश्वर का गुणगान करेंगे और कहेंगे कि प्रशंसनीय है वह ईश्वर जिसने हमारे बारे में अपना वादा पूरा कर दिया और स्वर्ग को हमारे रहने की जगह बनाया। इसी प्रकार वे कहेंगे कि नेक अमल अंजाम देने वालों का कितना अच्छा प्रतिदान है।

इसी प्रकार स्वर्ग में जाने वाले महान ईश्वर का गुणगान करते हुए कहेंगे कि महान व प्रशंसनीय है वह ईश्वर जिसने दुःखों को हमसे दूर कर दिया। यहां किसी प्रकार का दुःख नहीं है। महान ईश्वर स्वर्ग में जाने वालों के दिलों से द्वेष को निकाल देगा। वे स्वर्ग के बाग़ों में वृक्षों के नीचे सिंहासन पर बैठे होंगे। जो भी स्वर्ग में दाख़िल हो गया उसे कभी भी वहां से नहीं निकाला जायेगा। स्वर्ग में जाने वालों को महान ईश्वर की ओर से हर प्रकार की अनुकंपा प्राप्त होगी वे एक दूसरे से ख़ुशी से वार्तालाप करेंगे, स्वर्ग के वृक्षों की शीतल छाया में होंगे और जिस चीज़ की इच्छा करेंगे वह चीज़ स्वयं उनके पास आ जायेगी। महान ईश्वर से दुआ है कि हम सबको रमज़ान महीने का रोज़ा रखने और नेक काम करने का सामर्थ्य प्रदान करे और हम सबको स्वर्ग में जाने वालों की पंक्ति में क़रार दे।

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