Nov २७, २०१९ १७:३१ Asia/Kolkata

आज अमरीका में नस्लभेद एक महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौती में बदल चुका है।

अप्रैल 2018 के एनबीसी चैनल के सर्वेक्षण से पता चलता है कि अमरीका के 64 प्रतिशत से अधिक लोग नस्लभेद को देश की एक बड़ी आर्थिक व सामाजिक चुनौती समझते हैं। दूसरे आंकड़े और सर्वेक्षण भी बताते हैं कि हालिया दो वर्षों के दौरान नस्लभेद और जातीवाद, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की नीतियों और कार्यवाहियों की वजह से बढ़ गया है। जातीवादी हमले, अमरीका के लिए न केवल एक मूल समस्या में बन गया है बल्कि आंतरिक स्तर पर तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस देश के लिए सामाजिक व राजनैतिक परिणाम भी लिए हुए था।

वर्ष 2018 में एसोशिएटेड प्रेस के सार्वजनिक जांच केन्द्र की ओर से राए गये एक सर्वेक्षण के आधार पर अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद, देश में नस्ली भेदभाव की स्थिति बहुत ही बदतर हो गयी है। इस सर्वेक्षण के आधार पर अधिकतर अमरीकी जनता ट्रम्प को एक नस्लभेदी क़रार देती है। इस सर्वेक्षण में शामिल 10 में से 8 लोग श्याम वर्ण के हैं जबकि तीन चौथाई हिस्पानियाई नस्ल के जबकि जबकि आधे श्वेत वर्ण के लोग थे। इस सर्वेक्षण में शामिल 57 प्रतिशत जवाब देने वालों का यह मानना है कि मुसलमानों के लिए ट्रम्प की नीतियां अनुचित नहीं हैं जबकि 56 प्रतिशत लोगों ने इस नीति को हिस्पानियाई नस्ल के लिए भी बुरा क़रार दिया है।

डोनल्ड ट्रम्प अमरीकी नागरिकों के एक बड़े वर्ग की नस्लभेदी भावनाओं को भड़काकर सत्ता में पहुंचे और उन्होंने सत्ता में पहुंचते ही व्यापक स्तर पर नस्लभेदी कार्यवाहियां अंजाम दीं।  उन्होंने मैक्सिकों के लोगों को अपराधी और यौन रोगी की उपाधि दी और मुस्लिम रेडिकल टैरिरिस्ट जैसे शब्दों का प्रयोग करके मुसलमानों के अमरीका प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।  

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इसी प्रकार शारलोटेज़ीलो शहर में गोरों को बेहतर समझने वाले ग्रुप और नस्लभेदी बर्ताव के विरुद्ध सक्रिय लोगों के बीच होने वाली रक्ति रंजित झड़पों के बाद दक्षिणपंथियों की निंदा करने से कतराते रहे और असमान्य कार्यवाही करते हुए कुछ समय बाद ब्रिटेन के एक नस्लभेदी गुट की इस्लाम विरोधी फ़ोटोज़ को अपने ट्वीटर हैंडल से शेयर किया। इस ट्वीटर हैंडल के 4 करोड़ से अधिक फ़ालोअर हैं और उन्होंने इन फ़ोटोज़ को देखा थी।

अमरीका में नस्लभेदी हमलों में वृद्धि के कारणों में मतभेद में वृद्धि, फांसीवाद की ओर रूझान में वृद्धि और अंततः भीतरी मतभेद की ओर संकेत किया जा सकता है। दक्षिण कट्टरपंथियों में नियो नाज़ी, गोरे सबसे श्रेष्ठ दृष्टिकोण रखने वाले और कट्टरपंथी राष्ट्रवादी गुप्स शामिल हैं और यह गुट अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में बहुत मज़बूत हुए और इन्होंने पलायनकर्ताओं के विरुद्ध खुलकर फांसीवाद के नारे लगाए और मोर्चे खोल लिए।

अमरीकी विश्व विद्यालय जार्ज वाशिंग्टन में अंतर्राष्ट्रीय मामलों और व्यापार के प्रोफ़ेसर हुसैन अस्करी ने "विचार के काल" नामक पत्रिका से बात करते हुए किहा कि ट्रम्प और ट्रम्पवाद जो गोरे लोगों की अप्रसन्नता और क्रोध का परिणाम थी, अमरीकी समाज में फांसीवाद के मज़बूत होने और इसकी ओर रुझान पैदा होने का कारण बनी।

कनाडा के मिक मिस्टर विश्वविद्यालय में अमरीकी प्रोफ़ेसर हेनरी ए जेरोलेक्स, फ़िलोस्फ़ी व सोशल क्रिटीसीज़्म नामक पत्रिका में लिखते हैं कि ट्रम्प के चुने जाने से फांसीवाद और सत्तावाद को किनारे से अमरीका की केन्द्रीय नीति में लाया गया। उन्होंने अमरीका में न्यो फांसीवाद के प्रकट होने और गोरे सबसे श्रेष्ठ गुट के अमरीका के सभी राजनैतिक व सामारिक केन्द्रों पर नियंत्रण की सूचना दी और कहा कि इस बात की अधिक संभावना पायी जाती है कि अमरीका एक गृह युद्ध तथा मुसलमानों, पलायनकर्ताओं, अल्पसंख्यकों और लैटिन अमरीकी नस्ल के लोगों के विरुद्ध बाहरी युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से इस देश के बाहरी और आंतरिक स्तर पर नस्लभेद की ओर बढ़ने के परिणामों में से एक खाई का गहराना और अमरीकी समाज का दो धड़े मे बंट जाना है जिस पर अमरीका आज बहुत अधिक बल दे रहा है। अमरीका में होने वाले नये सर्वेक्षण से पता चलता है कि अमरीका में रहने वालों के बीच खाई बहुत गहरा गयी है और देश की दो बड़ी मुख्य पार्टियों के सदस्यों और समर्थकों के बीच बहुत अधिक विरोधाभास पाया जाने लगा है।

अमरीका में डेमोक्रेट पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक प्रतिदिन एक दूसरे से दूर होते जा रहे हैं और इन दोनों पार्टियों के समर्थक और कार्यकर्ता एक दूसरे से इतने अधिक दूर हो गये हैं और इनमें बहुत अधिक विरोधभास पाया जाने लगा है। वर्ष 2018 में होने वाले शोध के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जातीवाद, धर्म, शिक्षा, उम्र और लिंग के मुद्दे से हटकर पार्टी के संबंध और रूझान, अमरीकी समाज में गहरी खाई का मुख्य कारण है और दोनों पार्टियों और उनके समर्थकों के बीच मतभेद की असल वजह उनलड ट्रम्प हैं।

इसी के साथ अमरीका में राजनेता और समाज में सक्रिय लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि देश के राष्ट्रपति की दक्षिणपंथियों के बारे में बर्ताव की वजह से यह गुट पूरे अमरीका में बुरी तरह फैल रहा है और उसने अमरीका के हर स्थान और जगह पर अपनी पैठ मज़बूत बना ली है। अमरीका में दक्षिणपंथियों के मज़बूत होने की ही वजह से इस देश में शारलोटेज़ीलो शहर और अन्य क्षेत्रों में हुई रक्तरंजित घटना है।

अमरीका में निर्धन दक्षिण नामक एक क़ानूनी कल्याणकारी संस्था के प्रमुख रिचर्ड कोहन का कहना है कि ट्रम्प के नस्लभेद और विदेशियों से घृणा की वजह से ही अमरीका में दक्षिण कट्टरपंथियों के मनोबल बढ़े हैं और इन गुटों की अमानवीय कार्यवाहियों में वृद्धि हुई है। वास्तव में अमरीका में जातीवादी विद्रोह तथा फांसीवाद और नियो फांसीवाद, दो फाड़ होना, डेमोक्रेट्स और रिपब्पिकंस के बीच मतभेद में वृद्धि, हिंसा की भरमार तथा अमरीकी समाज में अशांति और हिंसा में वृद्धि, ट्रम्प के काल में हिंसा में वृद्धि और नस्ली भेदभाव के गहरने का कारण बनी है।

नवम्बर 2018 में अमरीकी समाचार पत्र यूएसटूडे ने शारलोटेज़ीलो शहर की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्रम्प के नस्लभेदी बर्ताव को इस घटना के कारणों में क़रार दिया और इसको अमरीकी की बर्बादी की प्रक्रिया क़रार दिया। कुछ लोगों का यह मानना है कि अमरीका ट्रम्प के साथ गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है और देश के भीतर और बाहर अमरीका की स्थिति कमज़ोर हो रही है।

वर्ष 2018 में जेफ़री टोबिन ने अमरीकी पत्रिका में लिखा कि ट्रम्प को सत्ता से हटाने के लिए भारी दबाव संभव है कि गृहयुद्ध का कारण बन सकता है। इस प्रक्रिया के जारी रहने की स्थिति में विरोध प्रदर्शन, हिंकस घटनांए और नस्लभेदी हमले तेज़ हो जाएंगे। उनका कहना था कि ट्रम्प पर महाभियोग चलाने की संभावना भी प्रबल है।

ट्रम्प के कार्याकाल में अमरीका में नस्लभेदी बर्ताव में वृद्धि अंतर्राष्ट्रीय लेहाज़ से अनेक प्रभाव है। इसका पहला प्रभाव, नस्लभेदी टकराव में वृद्धि और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में अमरीका की प्रतिष्ठा, स्थान और विश्वसनीयता में कमी का कारण बन सकता है।  अमरीका ने हमेशा ही ख़ुद को अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में लेब्रल लोकतंत्र के आदर्श के रूप में पेश करने का प्रयास किया।

इसके दूसरे प्रभाव में अमरीका की नर्म शक्ति में कमी की ओर संकेत किया जा सकता है। हार्डवर्ड विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संपर्क के प्रोफ़ेसर जोज़फ़ नाइ ने नर्म शक्ति शब्द की पहल की है। वे बेल्फ़ोर विश्वविद्यालय के लिए अपने लेख में लिखते हैं कि ट्रम्प, अमरीका की नर्म शक्ति के पतन का कारण बने हैं। आर्थिक क्षेत्र में नोबल पुरस्कार से सम्मानित तथा वैश्विककरण के विरोधी जोज़फ़ स्टीग्लेट्ज़ का 2018 में यह मानना था कि ट्रम्प के सत्ता में आने तथा नस्लभेदी बर्ताव में वृद्धि की वजह से अमरीका की नर्म शक्ति ढल रही है। प्रसिद्ध टीकाकार फ़ोकोयामा अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में अमरीकी भूमिका की कमी और लेब्रल लोकतंत्र के पतन की ओर संकेत करते हैं।

कुल मिलाकर हालिया परिवर्तनों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अमरीका के क़ानूनी, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक ढांचे में नस्लभेद मिला हुआ है। अलबत्ता अमरीकी सत्ता में ट्रम्प के पहुचंने से पहले से ही विदित रूप से वाशिंग्टन ने नस्लभेद की चर्चा से दूर रहने का फ़ैसला कर लिया और इन सब बातों को वह अतीत की ओर मोड़ते हैं और यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि अब उनका उस काल से कोई वास्ता नहीं है और अब अमरीका दूसरे दौर में क़दम रख चुका है और इस देश में नस्लभेद का कोई नामो निशान नहीं है किन्तु जैसा कि इस्लामी क्रांति के विरष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बल देकर कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अमरीका की वास्तविक छवि पेश कर दी और चुनाव काल में तथा ट्रम्प के चुने जाने के बाद अमरीका में सत्तासीन संस्था का राजनैतिक, आर्थिक, शिष्टाचारिक और सामाजिक भ्रष्टाचार खुलकर सामने आ गया। (AK)   

 

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