Mar ०५, २०२० १२:४७ Asia/Kolkata
  • रविवार - पहली मार्च

पहली मार्च सन  1815 ईसवी को नेपोलियन बोनापार्ट के एलब द्वीप से फरार के बाद उनकी 100 दिवसीय तानाशाही आरंभ हुई।

इस द्वीप में दस महीने के बाद 1815 के फरवरी महीने की 27 तारीख़ को नेपोलियन अपने एक हज़ार वफ़ादार कमांडरो और सैनिको के साथ फ़रार हो कर फ्रांस में प्रविष्ट हुए। इस प्रकार से उनके 100 दिवासीय शासन का आरंभ हुआ। वाटरलू युद्ध में 1815 ईसवी को नेपोलियन ने ब्रिटेन और प्रांस से पराजय का मुह देखा और फिर उन्हें देशा निकाला देकर सेन्ट हेलेन द्वीप भेज दिया गया जहां 6 वर्षों के बाद उनका निधन हो गया।

पहली मार्च सन 1871 ईसवी को जर्मनी से फ्रांस की खुली पराजय के बाद फ्रांस  की राष्ट्रीय संसद ने इस देश के नरेश नेपोलियन त्रितीय को अपदस्थ और राजशाही व्यवस्था को निरस्त कर दिया। जर्मनी के साथ संधि की परिस्थितियों की समीक्षा के लिए गठित की गयी की इस संसद ने यह निर्णय लेकर फ्रांस की क्रान्ति के 82 वर्षों बाद व्यवहारिक रुप से फ्रांस में राजशाही को समाप्त कर दिया।

सन 1789 में फ्रांस में क्रान्ति आने के बाद नेपोलियन बोनापार्ट ने पहली बार स्वयं को इस देश का सम्राट घोषित किया और उनके बाद भी कई लोग फ्रांस के नरेश बने। 1871 में राजशाही के बाद इस देश में तीसरी बार लोकतंत्र लागू हुआ।

 

पहली मार्च सन 1892 ईसवी को जापान के लेखक और साहित्यकार आकोटा गावा का राजधानी टोकियो में जन्म हुआ। उन्हें जापान के आधुनिक साहित्य के संस्थापको में गिना जाता है। उन्होने अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। 1927 ईसवी में उनका निधन हो गया।

 

पहली मार्च सन 1898 ईसवी को दक्षिणी अमरीका के उत्तर में स्थित एटलांटिक महासागर के पोर्टोरीको द्वीप में स्पेन ओर अमरिका के मध्य युद्ध समाप्त हो जाने के बाद अमरीकी आक्रमणकारियों का अधिकार स्थापित हो गया। 1493 ईसवी में पुर्तगाल के विख्यात नाविक क्रिस्टोफर कोलम्बस ने इस द्वीप लगाया था। अमरीका ने इस द्वीप को अपने आधिकार में लेने के बाद इस अपने हथियार गोदाम में परिवर्तित कर दिया। इस प्रकार से कि यहॉं अमरीका के 13 सैनिक ठिकाने बन गये।

 

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