Apr १५, २०२० १२:१२ Asia/Kolkata

शुरु में ही आप को यह भी बता दें कि किरमान को " संग्रहालयों का नगर" कहा जाता है।

आज हम आप को किरमान के पत्थर के संग्रहालय की सैर कराएगें जिसे " गुंबदे जबलिया " भी कहा जाता है। यह किरमान की एक अत्याधिक रहस्यमय इमारत है। यह इमारत, इतने बरस बीत जाने के बावजूद अपनी जगह पर खड़ी है। 

इस मूल्यवान इमारत को अष्टकोणीय रूप में बनाया गया है और उसके निर्माण में ज़्यादातर पत्थरों का इस्तेमाल ही किया गया है। आठ दरवाजों वाली  इस इमारत का हर कोण, दो मीटर चौड़ा है। फिलहाल इमारत को अधिक मज़बूत रखने के लिए उसके सात दरवाज़ों को पत्थर से बंद कर दिया गया है और केवल एक ही दरवाज़ खुला है। गुंबदे जबलिया की छत, ईंट से बनायी गयी है और उसे प्लास्टर से सजाया गया है। अध्ययनकर्ता, बहुत से शोधों के बाद भी यह पता नहीं लगा पाए कि इस इमारत को कब बनाया गया लेकिन जिस तरह से उसे बनाया गया है उसे देख कर यह अनुमान लगाया जाता है कि इस रहस्मय इमारत को सासानी काल के अंत में बनाया गया और इस्लामी काल के आरंभ में उसकी मरम्मत की गयी। या फिर इस्लामी काल के आंरभ में ही इस्लामी शिल्पकारों ने सासानी काल की शैली से प्रेरणा लेकर उसे बनाया है। यह इमारत ईरान की राष्ट्रीय धरोहर में पंजीकृत है। पंद्रह साल पहले इस इमारत को " पत्थर संग्रहालय" बना दिया गया। इस समय इस इमारत में विभिन्न इतिहासिक काल खंडों से संबंध रखने वाले 120 शिलालेख मौजूद हैं। 

" गुबंदे गब्री, किरमान में एक गुंबदीय इमारत है जो इतिहास के थपेड़ों से सुरक्षित रहने में सफल हुई ...गुंबदे गब्र या गुंबदे जबलिया आठकोणीय इमारत है और उसकी ऊंचाई बीस मीटर है... इस इमारत की चौड़ाई, नीचे 30 मीटर है और ऊपर पहुंच कर हर दो मीटर पर एक  एक दरवाज़ा बनाया गया है। ... आज कल इमारत की मज़बूती बनाए रखने के लिए इस इमारत के 7 दरवाज़े बंद कर दिये गये हैं। ... हालांकि इस इमारत की निर्माण तिथि के बारे में कुछ सही सूचना नहीं है किंतु जिस शानदार तरीक़े से और जिस शैली में उसे बनाया गया है उससे कुछ अदांज़ा ज़रूर लगाया जा सकता है। एसा लगता है कि यह इमारत वास्तव में एक अग्निकुंड थी। ... कहा जाता है कि इस इमारत के निर्माण के लिए जो मसाला बनाया गया उसमें ऊंट का दूध और मुर्गी की अंडे की ज़र्दी मिलायी गयी... और इसकी मज़बूती का राज़ इसी में छुपा है। ... इतिहासिक किताबों में इस इमारत को जबालिया, जबाल संग और माबदे संग भी कहा गया है।

किरमान , ईरान का सब से विशाल प्रान्त है और तुर्क, हुर, लक और बलोच जातियों ने विभिन्न कालों में इस प्रान्त का रुख किया है इस लिए इस प्रान्त के विभिन्न क्षेत्रों में भाषा और स्वर की भरमार है और यह विविधता इस प्रान्त की सैर को और भी अधिक रोचक बनाती है। इन सब के साथ ही पारसियों और यहूदियों की भी एक बड़ी संख्या इस प्रान्त में रहती है। इस प्रान्त में धार्मिक अल्पसंख्यक पूरी स्वतंत्रता के साथ अपने धार्मिक संस्कारों का आयोजन करते हैं। पारसियों का सब से बड़ा धार्मिक त्योहार हर साल किरमान में होता है और इस त्योहार को ईरान की राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहरों में पंजीकृत किया गया है। 

 

  किरमान में अग्निकुंड या पारसियों का मंदिर सन 1924 में बनाया गया था जो वास्तव में ईंट की एक इमारत है जिसके मुख्य द्वार पर तीन शब्द लिखे हैं ः हुमत, हूखत, हूरश्त । जिसका अर्थ है , भली सोच, भली करनी और भली कथनी। पहले इस इमारत को चार हज़ार वर्गमीटर की ज़मीन पर बनाया गया था और फिर उसकी ज़मीन बढ़ा कर आठ हज़ार वर्गमीटर कर दिया गया। इस समय इस उपासना स्थल में एक हॅाल, डायनिंग हॅाल, पुस्तकालय, कंप्यूटर सेंटर तथा पारसियों का एक संग्रहालय है। इस अग्निकुंड में जो आग जल रही है उसे कई हज़ार साल पहले भारत से ईरान लाया गया था। 

" ... में फलाती हूं और इस मंदिर में अग्निकुंड की ज़िम्मेदारी मुझ पर है। यहां पर जो आग है वह एक हज़ार साल से है। यह आग  पार्स से यह इस प्रान्त में आयी। सब से पहले इसे क़िले दुख्तर में रखा गया था ... पार्सी धर्म  में आग को एक झंडा या प्रतीक कहा जाता है और हम आग की एक प्रतीक के रूप में पूजा करते हैं ... मेरा संबंध यज़्द से है लगभग सात साल से किरमान में अपने धार्मिक भाईयों कीसेवा करता हूं। मैं सुबह आठ बजे जब मंदिर में आता हूं तो सब से पहले आग की देख भाल करता हूं और उसमें ईंधन आदि डालता हूं उसके बाद फिर मंदिर में आने वाले लोगों के सवालों का जवाब देता हूं। ... हम लोग प्रायः आग जलाने के लिए एेसी लकड़ियों का प्रयोग करते हैं जो अधिक देर तक जलती रहें और लकड़ी के सथ ही आग में हम लोग कुंदुर और लोबान आदि का प्रयोग करते हैं ताकि उपासना स्थल में सुगंध फैली रहे। अग्नि कुंंड में यह कोशिश की जाती है कि , अग्नि, जल, वायु और मिट्टी जैसे चारों तत्व एक साथ रहें। जल प्रवाह व पवित्रता का , आग, उत्साह व गर्मी का , मिट्टी विनम्रता की प्रतीक है। ... हमारे उपासना स्थल में आने के लिए पुरुषों के लिए ज़रूरी है कि उनका सिर ढंका हो और महिलाएं पवित्र हों। सिर ढांकना एक प्रकार की परंपरा है। सफेदी पवित्रता की प्रतीक है और हमें भी अपने भीतर और बाहर सफेद रहना चाहिए अर्थात हर प्रकार के पाप से पवित्र रहना चाहिए... इस इमारत को काजारी शासक नासेरुद्दीन के काल में बनाया गया और इसका डिज़ाइन भारत के पारसियों ने तैयार किया ... उपासना स्थल में एक संग्रहालय भी है जिसमें बहुत से बर्तन और चीज़ें हैं। ... सौभाग्य से हमें यहां अन्य धर्मों से कोई समस्या नहीं है और हम जिस देश में रहते हैं अर्थात इ्सलामी गणतंत्र ईरान में हमारे धर्म को संविधान में औपचारिकता दी गयी है और हम शांति के साथ अपने धार्मिक नियमों का पालन करते हैं और अपने कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं और हमें यहां इस देश में कोई समस्या नहीं है। यह ईरान हम सब का देश है हम सब को मिल कर एक दूसरे के सहयोग से इस देश को आगे ले जाना है। " 

किरमान के पारसियों का संग्रहालय जोराष्टियन लोगों के बारे में विश्व का पहला संग्रहालय है जिसका सन 1991 में निर्माण आरंभ हुआ और 2001 में खत्म हुआ। इस संग्रहालय के एक भाग में विभिन्न प्रकार के अग्निकुंड, तेल और दिये आदि रखे गये हैं। इस संग्रहालय की सब से पुरानी चीज़, हाथ से लिखी एक किताब है जो दो सौ साल पुरानी है। इस संग्रहालय का सब से क़ीमती भाग वह हैं जहां दस्तावेज़ रखे गये हैं। महिलाओं की पोशाक भी इस संग्रहालय में रखी गयी हैं जो सौ से लेकर डेढ़ सौ साल पुरानी हैं। इन प्रकार की पोशाकों का उल्लेख हखामनी और सासानी दौर के दस्तावेज़ों में मिलता है। यह पोशाक पारसी महिलाओं से विशेष थे। किरमान का अग्निकुंड, पारसियों के लिए तीर्थ स्थल है किंतु हर साल दस हज़ार से अधिक पर्यटक भी इस स्थल को देखने के लिए वहां जाते हैं। 

पारसियों के इस उपास्थल की सैर पर हम किरमान नगर की यात्रा खत्म नहीं करेगें बल्कि हम आप को ईरान के सनअती संग्रहालय तक भी ले चल रहे हैं। इस संग्रहालय में ईरान के समकालीन कलाकारों की कला कृतियों के साथ विदेशी कलाकारों की रचनाएं भी नज़र आती हैं। इस संग्रहालय का नाम भी उसे बनाने वाले के नाम पर रखा गया है। इस संग्रहालय को उस्ताद अली अकबर सनअती ने बनाया था और इस में मौजूद आधी से अधिक चीज़ें, उन्ही की हैं। 

" किरमान के सनअती संग्रहालय की आधार शिला लगभग सत्तर साल पहले उस्ताद अली अकबर सनअती द्वारा रखी गयी । पहले इसे अनाथालय के रूप में प्रयोग किया जाता था। ...उस्ताद अली अकबर सनअती किरमानी प्रसिद्ध चित्रकार थे और उन्होंने ही इस संग्रहालय को बनाया था जिसे बाद में उनकी ही रचनाओं का संग्रहालय बना दिया गया। ... सन 1996 में इस संग्रहालय की मरम्मत की गयी जिसके बाद हमने संग्रहालय की रचनाओं को देखने का अवसर सब को प्रदान किया और संग्रहालय के दरवाज़े खोल दिये। .... किरमान के उस्ताद अली अकबर सनअती संग्रहालय में विश्व के कई प्रसिद्ध चित्रकारों और प्रतिमा बनाने वालों की रचनाएं हैं जिन्हें देखने के लिए लोग दूर दूर से इस संग्रहालय में जाते हैं। ... उस्ताद अली अकबर सनअती संग्रहालय में छे हाल हैं जिनमें से चार को समकालीन कलाकारों के लिए, एक को उस्ताद अली अकबर सनअती की रचनाओं के लिए और एक को उस्ताद सोहराब सेपहरी के कलाकृतियों के लिए विशेष किया गया। ... चूंकि इस संग्रहालय में समकालीन कला के बेहद उत्कृष्ट नमूने रखे हैं इस लिए इसे ईरान में समकालीन कला का दूसरा सब से बड़ा संग्रहालय समझा जाता है और इसी लिए इसका महत्व भी है। "

इस संग्रहालय की 83 कलाकृतियां अतीत व समकालीन ईरानी कलाकारों की हैं जबकि 16 कलाकृतियां विदेशी कलाकारों की हैं । उस्ताद अली अकबर सनअती  को प्रतिमा बनाने में दक्षता प्राप्त थी और वह ईरान के बड़े और प्रसिद्ध कलाकारों में से एक हैं। सन 1973 में उनका निधन हो गया और उनके पोते और और कलाकारों के प्रयासों से इस संग्रहालय को बनाया गया। बहरहाल किरमान, ईरान का एक अत्यन्त खूबसूरत क्षेत्र है जिसे ज़रूर देखा जाना चाहिए और लेकिन यह भी जान लें कि इस नगर की खूबसूरती को कला और एतिहासिक अवशेषों तक ही सीमित न समझें बल्कि इस क्षेत्र की संस्कृति भी देखने और महसूस किये जाने की चीज़ है। इस क्षेत्र के लोग बहुत ही मेहमान नवाज़ होते हैं इसके अलावा भी अभी किरमान के बारे में बहुत कुछ बताना बाकी है तो हमारा इंतेज़ार कीजिएगा अगली भेंट तक। 

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