Apr १९, २०२० १६:५८ Asia/Kolkata

"इन तीस बरसों में मैंने बहुत अधिक कष्ट उठाए हैं, इस पारसी के माध्यम से मैंने ईरान को जीवित कर दिया है, मैंने पद्य द्वारा एक ऐसे बड़े महल का आधार रखा है जिसे तेज़ हवाओं और बारिश से कुछ नुक़सान नहीं होगा। मैं अब नहीं मरूंगा और जीवित रहूंगा क्योंकि मैंने कथनों के बीज बो दिए हैं।"

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