Apr २५, २०२० १७:०७ Asia/Kolkata

हम किरमान प्रान्त की यात्रा जारी रखेंगे पिछली बार हम आप को संग्रहालय ले गये थे जहां प्राचीन चीज़ें देखने को मिली लेकिन इस बार हम आप को बाग की सैर करा रहेंगे वह भी शाही बाग की। हमारे साथ रहें।

आप को यह बता दें कि किरमान ईरान का एक एसा इलाक़ा है जहां चार मौसम होते हैं। ईरान के कम ही प्रान्तों में चारों मौसम एक साथ और इतनी सुन्दरता के साथ नज़र आते हैं। किरमान में जब आप खूबसूरत मरुस्थल की सैर कर रहे हों तो कुछ ही दूर जाकर आप ठंडे और हरे भरे क्षेत्र में भी पहुंच सकते हैं। इस प्रान्त में थोड़ी थोड़ी दूर पर मौसम बदलते हैं। किरमान में चारो ओर फैले रेगिस्तान में अचानक ही खूबसूरत और हरे भरे बाग नज़र आ जाते हैं जो निश्चित रूप से स्वर्ग जैसे महसूस होते हैं। यही वजह हे कि किरमान की सैर जारी रखते हुए आज हम आप को " शाज़दा माहान" बाग ले चलते हैं। इस बाग को युनिस्कों में ईरान के एक बड़े बाग के रूप में पंजीकृत किया गया है। इस बाग तक पहुंचने के लिए किरमान से बम जाने वाली सड़क पर 35 किलोमीटर की रास्ता तय करना पड़ता है और फिर माहान नगर से  तीन किलोमीटर की दूरी पर रेगिस्तान के बीचो बीच अचानक ही हरे भरा बाग नज़र आता है। 

 

 " शाज़दा माहान" बाग, ईरान का एक प्राचीन व एतिहासिक परशियन बाग है। यह बाग किरमान नगर के निकट और रेगिस्तान में स्थित है। यह बाग ईरान के दक्षिण पूर्वी नगर किरमान के निकट माहान नामक क्षेत्र के पास स्थित है। यह बाग काजारी शासन के दौरान और 19वीं सदी के अंतिम दिनों में बनाया गया है। ... एेसे इलाक़े में जहां दूर दूर तक और जहां तक नज़र जाती है रेगिस्तान नज़र आता है, शाहज़ादा बाग मरुस्थल के माथे पर किसी रत्न की तरह चमकता है। इस बाग की इमारत साढ़े पांच हेक्टर, लंबाई 400 और 120 चौड़ा है। यह इमारत आयाताकार है और बाग के चारों ओर दीवार है जो इसे, सूखे और रेगिस्तानी क्षेत्र से अलग करती है। ...शाहज़ादा बाग, ऊंचाई पर बनाया गया है जो समुद्र तल से 1750 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। ... आस पास के पहाड़ों से टकरा कर ठंडी हवाएं इस बाग के मौसम को बेहद अच्छा बना देती हैं। ... अच्छा मौसम और खूबसूरत दृश्य , इस बाग में जाने वालों के लिए एक अच्छा अनुभव हो सकता है। शाहज़ादा बाग में बेहद शांति है और वहां जाने वालों को स्वर्ग जैसा आभास होता है। ... इस इमारत के प्रांगण में कई हौज़ और फव्वारे हैं जो चीड़ के पेड़ों से घिरे हुए हैं। ... बाग के प्रवेश द्वारा को जिस शैली में बनाया गया है उससे यह बाग ईरान के अन्य बागों से अलग नज़र आता है। ... आवासीय इमारत के अलावा, प्रवेश द्वार के दूसरी तरफ एक दो मंज़िला इमारत भी नज़र आती है। ... इन दोनों इमारतों के बीच सीढ़ियां बनी हैं और उन सीढ़ियों से पानी बड़े खूबसूरत अदांज़ में ऊपर से नीचे की ओर बहता है। ... इस बाग में तरह तरह के पेड़ लगाए गये हैं जिनमें चीड़ और सरो के पेड़ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं और सारे पेड़ों को उचित रूप से रौशनी मिलती है इसके ही पानी और हवा भी उन्हें तरो ताज़ा रखने में मददगार होती है। ... बाग का पानी  भूमिगत नालियों द्वारा प्राप्त होता है और इन भूमिगत नालियों में पानी जूकार पहाड़ियों से आता है। ...इस बाग में एक हौज़ है जहां पानी एकत्रित होता है और फिर वहां से पूरे बाग में जाता है। ... हर साल बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक इस बाग का रुख करते  हैं। ...  सन 2003 बम और किरमान में जो भयानक भूकंप आया था और जिसमें बम का किला तबाह हो गया था  उससे इस बाग को भी नुक़सान पहुंचा ... शाहजादा बाग, को ईरान के अन्य कई बागाों की   तरह  विश्व धरोहर के रूप में  यूनिस्कों में पंजीकृत किया गया है।

किरमान के शाहज़ादा बाग को  रेगिस्तान में ठांठे मारते हरियाली के एक सागर की तरह कहा जाता है जो रेगिस्तान में चलते चलते अचानक नज़रों के सामने प्रकट हो जाता है। माहान के शाहज़ादा बाग को ईरान के अत्यन्त सजे संवरे बागों में गिना जाता है। बाग में बहुत ही सुन्दर ढंग से पेड़ लगाए गये हैं और उन की जड़ों में कल कल करता पानी बहता है जो इस बाग में चहल कदमी करने वालों को किसी और लोक में पहुंचा देता है। इस बाग का सब से अच्छा और आकर्षक भाग वह इमारत है जिसमें जाने के बाद आप हैरत में पड़ जाएंगे। इस इमारत के चप्पे चप्पे पर आप को ईरानी संस्कृति और कला की छाप नज़र आएगी। शाहज़ादा माहान बाग मुख्य द्वार, बालाखाना , बागे ख़लवत, खानए ज़ईमबाशी और पहरेदारी के लिए मीनार जैसे विभिन्न भाग और उनके विशेष नाम हैं। 

इस बाग की सिंचाई विशेष शैली में की जाती है  और इस सिस्टम को बाग का निर्माण करने वालों ने बहुत की बारीकी से तैयार किया है। बसन्त और गर्मियों के मौसम में बाग में फूल खिलते हैं और पूरा बाग भांति भांति की खुशबुओं से भर जाता है। बाग में रेस्टोरेंट और सराय भी है । इस बाग को  सन 1897 में काजारी काल में बनाया गया है। इस बाग का इतिहास और दस्तावेज़ों का विश्व की 35 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। बाग इतना खूबसूरत है कि हर पर्यटक का मन मोह लेता है। 

बाग की सैर तो हो गयी अब हम किरमान के प्रसिद्ध " बम" नगर चलते हैं जिसे " बम किले" की वजह से विश्व ख्याति प्राप्त है जो वास्तव में दुनिया की सब से बड़ी कच्ची ईंटों की इमारत है। इसे ईरान के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण नमूना कहा जाता है।। बम नगर के के इतिहास के बारे में बात करना बेहद कठिन काम है। बम नगर ईरान की नहीं बल्कि दुनिया के अत्याधिक प्राचीन क्षेत्रों में से एक है और कहा जाता है कि यह क्षेत्र लगभग सात  से दस हज़ार साल पुराना है किंतु सन 2003 में इस क्षेत्र में आने वाले भयानक भूकंप ने बम किले को भारी नुक़सान पहुंचाया। 

बम नगर किरमान शहर से 195 किलोमीटर की दूसरी पर दक्षिण पूर्व में स्थित है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चीज़ें बनायी जाती हैं और कई तरह के फल पैदा होते हैं लेकिन यहां के खजूर को पूरी दुनिया में शोहरत हासिल है। इसे भारत में " मज़ाफाती" खजूर के नाम से जाना जाता है। बम का क़िला पूरी दुनिया में मशहूर है और इस प्राचीन किले को देखने के लिए पूरी दुनिया से पर्यटक बम नगर जाते हैं। इस क़िले को युनिस्को ने विश्व धरोहर के रूप में पंजीकृत किया है।

 " यह प्राचीन इमारत, अरगे बम है। बम नगर किरमान प्रान्त में स्थित है। ...अरगे बम एक किले में स्थित है और चूंकि यह किले में सब से अधिक ऊंची जगह पर बना है इस लिए पूरे किले को ही अरगे बम कहा जा ता है। ... इस किले को रेगिस्तान में बनाया गया है जिसका क्षेत्रफल लगगभ 1लाख 80 वर्ग मीटर है। हालांकि इस इमारत की निर्माण तारीख के बारे में कई प्रकार के बयान हैं किंतु हमारा मानना है कि इसे हखामनी काल में बनाया गया है और तीन चार ईसा पूर्व में इसे बनाया गया है। लगभग दो हज़ार साल तक इस किले में लोग रहते थे उसके बाद काजार काल में यह किला गिर गया। ... सन 2003 में एक भयानक भूंकप के दौरान बम नगर और अरगे बम भी लगभग पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। ...इस एतिहासिक अवशेष के पुनर्निमाण में विश्व के कई देशों ने ईरान के साथ सहयोग किया। सब का एक ही उद्देश्य था और वह यह कि इस एेतिहासिक इमारत को किस प्रकार से सुरक्षित रखा जाए। ... यह इलाक़ा कभी महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र के रूप में मशहूर था और इसकी  ख्याति का कारण , रेशमी और सूती कपड़ों का उत्पादन था। यह किला सिल्क रोड के चौराहे पर स्थित था और इसे पूरब से पश्चिम के मध्य पुल कहा जाता था। ... भूकंप से पहले, अरगे बम दुनिया की सब से बड़ी कच्ची ईंट से बनी इमारत था... हर घर को कच्चे ईंट से बनाया गया था। ... यह कांम्पलेक्स दो भागों  पर आधारित था। एक शासकों के लिए और एक आम लोगों के लिए। आम लोगों का हिस्सा, शासकों वाले भाग को घेरे हुए था। शासक का भाग, घर , सैन्य छावनी, हम्माम और पहरे की बुर्जी पर आधारित था जब कि आम लोगों के लिए विशेष भाग में , उपासना स्थल, घर, सराय, पाठशाला और हम्माम पर आधारित था।  और दोनों भागों को एक दरवाज़े से जोड़ा गया था। ... अरगे बम के ्चारों ओर दीवारें थीं और पहरेदारी के लिए बुर्जियां भी थीं। इसके अलावा बादगीर के रूप में भी बुर्जियां बनायी गयी थीं जो हवा को अपने अंदर समेट कर किले में फैलाती थीं। ... सन 2004 में अरगे बम को विश्व धरोहर के रूप में पंजीकृत किया गया।

एेतिहासिक तथ्यों के अनुसार इस किले में लगभग 160 साल पहले तक लोग इस किले में रहते थे  लेकिन फिर वह लोग किले से निकल कर आस पास के इलाकों में बस गये और खेती बाड़ी में व्यस्त हो गये। किला हालांकि गारे मिट्टी और कच्ची ईंटो ंसे बनाया गया है किंतु  प्राचीन काल में यह दुश्मन के हमलों से अपने निवासियों को सुरक्षित रखता था। लेकिन भूंकप ने इसे तबाह कर दिया। जापान, इटली और फ्रांस सहित कई देशों ने इसे फिर  से बनाने में ईरान के साथ सहयोग किया और ईरान की संस्कृति और पुरातत्व विभाग के परिश्रम से यह प्राचीन किला तबाही से बच गया। किरमान की सैर जारी रहेगी अगली भेंट तक इंतेज़ार करें।

टैग्स

कमेंट्स