May ०४, २०२० १८:५१ Asia/Kolkata

किरमान की सैर जारी है और आज हम आप को ले चल रहे हैं मैमंद नामक एक अजीब गांव में।

यह अजीब इस लिए है क्योंकि यह गांव, दुनिया में सब से पुराना पत्थरों से बनें घरों की जगह है। इसी लिए इसे यूनिस्को ने विश्व धरोहर में पंजीकृत किया है। इस पूरे गांव में मकानों के लिए पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है जो अपने आप में एक अनोखी चीज़ है। हालांकि इस प्रकार के घर अन्य देशों में भी बनाए गये हैं किंतु मैमंद जैसी कोई दूसरी जगह विश्व में नहीं है। मिसाल के तौर पर तुर्की में " काबादौकिये " नामक एक गांव है लेकिन मैमंद को आवासीय गांव होने की वजह से अलग स्थान प्राप्त है।

मैमंद गांव का क्षेत्रफन 420 वर्ग किलोमीटर हैं। इस गांव के घरों का रूप बहुत ही अलग और विशेष है। इस गांव के लोग अपने घर बनाने के लिए ईंटों और गारे का प्रयोग नहीं करते बल्कि वह अपने घर पहाड़ों को खोद कर बनाते हैं।

मैमंद के लोग बेहद कृपालु और मेहमान नवाज़ हैं और इस गांव की यात्रा करने वालों का बड़ी गर्मजोशी से स्वागत करते हैं।

मैमंद की मस्जिद ईरान की उन गिनी चुनी मस्जिदों में शामिल हैं जिन्हें पहाड़ के सीने में बनाया गया है। मस्जिद में मीनार नहीं है। मस्जिद १२० वर्ग मीटर की है। मस्जिद के मेहराब को पत्थरों को तराश का रूप दिया गया है। ज़मीन पर मैमंद के हाथों से बुने सुन्दर कालीन बिछे हैं। दिन के समय मस्जिद में रौशनी दरवाज़े से आती है। यह मस्जिद गलभग दो सौ साल पुरानी है।

ईरान में बहुत से रेगिस्तान हैं, कुछ तटवर्तों क्षेत्रों में कुछ ईरान के केन्द्र में इस बड़े क्षेत्र का नाम शहदाद रेगिस्तान है।

यह रेगिस्तान , लूत का भाग है जो दुनिया का एक बड़ा, सूखा और नमक से भरा रेगिस्तान है।

शहदाद रेगिस्तान की यात्रा करने वाले बताते हैं कि रेगिस्तान में हवाओं से बने विचित्र टीलों को देखना बहुत अच्छा अनुभव है। जहां नक आंख काम करती है भांति भांति के आकारों में टीले नज़र आते हैं जिससे एसा लगता है मानो रेगिस्तान में कोई नगर बसा हो जहां सन्नाटा पसरा रहता है और कोई रहती नहीं।

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