Dec ०८, २०२० २०:०४ Asia/Kolkata
  • ईरान भ्रमण-62 (पवित्र नगर मशहद)

ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग ९०० किलोमीटर की दूरी पर एक बसा हुआ है।

इस नगर की जनसंख्या ३० लाख से अधिक है। यह राजधानी तेहरान के बाद जनसंख्या की दृष्टि से ईरान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। इसका नाम मशहद है। इस नगर का क्षेत्रफल २८८ वर्ग किलोमिटर है। यह ईरान के पूर्वोत्तर में बीनालूद एवं हज़ार मस्जिद पर्वत श्रंखलाओं के मध्य स्थित है। समुद्र की सतह से मशहद की ऊंचाई लगभग १०५० मीटर है। मशहद , इस्लामी जगत के पवित्र नगरों में से एक है। एतिहासिक धरोहरों और पर्यटन आकर्षणों की दृष्टि से मशहद, ईरान के समृद्ध नगरों में से एक है। विश्व के कोने से लाखों श्रृद्धालु एवं पर्यटक इस नगर की यात्रा पर आते हैं। यह एसा नगर है जो हमेशा यात्रियों से भरा रहता है।

अफ़शारी शासन काल में मशहद, ईरान की राजधानी हुआ करता था।

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का रौज़ा होने के कारण मशहद नगर, पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों से प्रेम करने वालों करोड़ों लोगों के ध्यान का केन्द्र बना हुआ है।

आपकी जीवन के अन्य दस वर्ष हारून के बेटों अमीन और मामून के सत्ताकाल में व्यतीत हुए। इस दौरान इमाम रज़ा ने हर प्रकार की पाबंदियों, अत्याचारों और कठिनाइयों के बावजूद बड़ी सूझबूझ से यह दौर गुज़ारा।

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का काल एसा था जब इस्लामी जगत में दर्शनशास्त्र र शास्त्रार्थ का चलन आरंभ हुआ था।

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के जनसमर्थन से तत्कालीन शासक बहुत परेशान था। वह चाहता था कि लोग उनकी योग्यता और उनके ज्ञान से अवगत न होने पाएं किंतु उसका उल्टा । अंतत : इमाम को सन २०२ हिजरी क़मरी के सफ़र महीने की अन्तिम तारीख़ को ज़हर देकर शहीद कर दिया गया।

जब अब्बासी ख़लीफ़ा मामून ने हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम को शहीद कर दिया तो आम जनमत के ध्यान को भटकाने के लिए उसने नौग़ान के बाग़ में इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम को दफ़्न कर दिया जिसके बाद से वह स्थान विश्व के समस्त लोगों विशेषकर शियों के लिए पवित्र स्थल में परिवर्तित हो गया।

पवित्र नगर मशहद में बहुत सी मस्जिदें और दर्शनस्थल हैं जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा उमड़ी रहती है।

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र मज़ार में कई बड़े बड़े हाल हैं जो ईरानी और इस्लामी वास्तुकला के अदभुद नमूने हैं। पूर्वी हाल या नक्कारख़ाना दो अलग अलग हालों से मिलकर बना है। इस हाल की ऊंचाई २६ मीटर है। इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र मज़ार के बग़ल में एक बहुत बड़ा मुस्तकालय भी है। यह ईरान और मध्यपूर्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय है। इस पुस्तकालय से पवित्र नगर मशहद और ईरान के दूसरे नगरों के ५० से अधिक पुस्तकालय और एक भारतीय पुस्तकालय जुड़ा हुआ है।

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का पवित्र मज़ार इस्लामी जगत में वास्तुकला का एक सुन्दरतम नमूना है। इस पवित्र मज़ार में मुनब्बतकारी, टाइल्स का कार्य, प्लस्टर आफ़ पैरिस का कार्य, आईनाकारी, ख़ातमकारी मोअर्रक़ारी अर्थात लकड़ी पर की जाने वाली चित्रकारी और पत्थरों को तराश कर किये जाने वाले कार्यों से लाभ उठाया गया है। इसी प्रकार पवित्र मज़ार में पानी पीने की सबीलें और मीनारों का भी निर्मा किया गया है। इन चीज़ों को पवित्र मज़ार का महत्वपूर्ण भाग समझस जाता है।

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र मज़ार में जो इमारतें हैं उनपर बारह मीनारें हैं। इनमें से एक , गुंबद के निकट है। उसका निर्माण उसी समय हुआ था जब गुंबद का निर्माण हुआ था जबकि दूसरे का निर्माण नादिर शाह के काल में हुआ था। इस मीनार के निर्माण में ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि दोनों मीनारे वैसे तो एक दूसरे से काफ़ी दूरी पर हैं किंतु जब कोई यात्री मज़ार के दक्षिण से रौज़े की ओर आता है तो उसे एसा दिखाई पड़ता है कि यह गुंबद , दोनों मीनारों के बीच में है।

हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र मज़ार के पास लगभग २५ महत्वपूर्ण एतिहासिक इमारतें हैं जो सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं। उनमें से हर इमारत अपने समय की वास्तुकला की गाथा सुनाती है। हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र रौज़े के पास शेख़ बहाई, शेख़ तबरसी और शेख़ हुर्रे आमेली जैसे इस्लामी जगत के प्रसिद्ध विद्वानों की क़ब्रें हैं।

 

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