Jan २५, २०२१ १४:१० Asia/Kolkata

गत 20 जनवरी को अमरीका में जो बाइडन ने नये राष्ट्रपति के रूप में शपथग्रहण किया और इस तरह से काले कारनामे वाले अमरीका के बेहद विवादस्पद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का काला दौर ख़त्म हो गया लेकिन उनकी विरासत जो ट्रम्प इज़म के नाम से पहचानी जाती है, वह पूरी दुनिया और ख़ास तौर पर अमेरिका को दीमक की तरह चाटती रहेगी।

हालिया कुछ हफ्तों के दौरान अमरीका में जो घटनाएं घटी हैं उसने अमरीका का सब कुछ बदल दिया और इन घटनाओं की छाया, अमरीका के भविष्य पर भी पड़ती रहेगी। नया साल ट्रम्प के इन्कार के साथ शुरु हुआ। उन्होंने अपने दसियों लाख समर्थकों के बीच एलान किया कि जीत उनकी हुई है और वह अगले चार वर्षों तक अमरीका के राष्ट्रपति रहेंगे। ट्रम्प को अमरीका के 7 करोड़ 40 लाख मतदाताओं ने वोट दिया जो अमरीका में कुल वोटों का 47 प्रतिशत भाग है और यह सन 2016 में उन्हें मिले कुल वोटों से एक करोड़ दस लाख अधिक था और इतने वोट उन्होंने, उनके खिलाफ कई जांचों और एक महाभियोग के बाद भी मिले जो बेहद ध्यान योग्य तथ्य है। शायद ट्रम्प को अपने समर्थकों की इसी ताक़त पर घमंड था जिसकी वजह से वह बार बार चुनाव परिणाम का इन्कार करते रहे और यहां तक कि 6 जनवरी को जब वाशिंग्टन में गुस्से से भरे अपने समर्थकों से उन्होंने कांग्रेस की इमारत पर हमला करने को कहा तो एक तरह से उन्होंने अपने ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी।  अलबत्ता ट्रम्प का ताबूत और उसमें कील आदि की बात एक विचार है इसके विपरीत कुछ विशेषज्ञों की जो राय है वह बेहद भयानक है जिसकी झलक ट्रम्प के बयानों से भी मिलती है। वह नये रूप में वापस आ सकते  हैं। नया रूप तो बस बात है, अस्ल में वह अपने पुराने और अस्ली रूप  में वापसी कर सकते हैं। वह नस्लभेद के रथ पर सवार होकर रंगभेद के रग में रंगे अपने समर्थकों को एक मंच देकर अमरीका में एक नया विभाजन शुरु कर सकते हैं जो दुनिया के साथ ही साथ अमरीका के लिए बेहद ख़तरनाक होगा। ट्रम्प पर नस्लवाद को बढ़ावा देने का हमेशा आरोप लगता रहा है। उन्होंने इस बारे में स्वयं बताया है।  इस ख़तरे को अमरीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडन ने बहुत अच्छी तरह से महसूस कर लिया है यही वजह है कि उनके पहले भाषण में बार बार एकता की बात की गयी जो वास्तव में विभाजन के प्रति उनकी चिंता और अमरीका के भविष्य पर ट्रम्प की काली छाया से भय का ही परिणाम थी। जो बाइडन कहते हैं कि वह सभी अमेरिकियों के राष्ट्रपति बनकर दिखाएंगे, वह अमेरिका से भेदभाव का ख़ात्मा करके दिखाएंगे। ट्रम्प और उनके समर्थकों के आतंक की वजह से बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह से पहले वाशिंग्टन को सैनिक छावनी में बदल दिया गया था यही नहीं 21 जनवरी तक अमरीका की राजधानी वाशिंग्टन में अपातकाल लगा दिया गया। शपथ ग्रहण समारोह ख़त्म हो गया लेकिन ट्रम्प इज़म नहीं।

शिकागो यूनिवर्सिटी में पोलिटिकल साइंस के प्रोफेसर और दुनिया भर में डेमोक्रेसी की गिरती साख पर कड़ी नज़र रखने वाले टॉम गिन्सबर्ग ने बीबीसी से फ़ोन पर कहा, सीनेट में ट्रायल का नतीजा कुछ भी हो उनका राजनीतक जीवन बाकी रहेगा। टॉम गिन्सबर्ग अपने इस विचार की वजह बताते हुए कहते हैं कि ट्रम्प ने पांच साल पहले रिपब्लिकन पार्टी को अपने नियंत्रित में कर लिया था रिपब्लिकन पार्टी उनकी पार्टी बन कर रह गयी है. उन्हें पार्टी से हटाना आसान नहीं होगा। ट्रम्प ने राष्ट्रपति के रूप में अपने अंतिम भाषण में भी कहा है कि एसी हालत में कि जब में सत्ता नयी सरकार के हवाले करने जा रहा हूं यह चाहता हूं कि आप जान लें कि जो आंदोलन हमने शुरु किया है यह उसका आरंभ है। (इफेक्ट) ट्रम्प वाइट हाउस से निकल गये हैं और रिपब्लिकन पार्टी नये नेता की तलाश में है लेकिन यह तो निश्चित है कि रिपब्लिकन पार्टी में ट्रम्प धड़ा बन चुका है जिसका नेतृत्व ट्रम्प स्वंय सकते हैं या फिर सीनेटर टेड क्रूज़ जैसे उनके कट्टर समर्थक इस धड़े की बागडोर संभाल सकते हैं। यही वजह है कि बहुत से विशेषज्ञों का यह मानना है कि ट्रम्प ने अपने चार वर्षीय सत्ता के दौरान जो कुछ किया है और जिस प्रकार की नीतियां अपनायी हैं वह सत्ता से उनके जाने के बाद रिपब्लिकन पार्टी से खत्म नहीं होंगे। बेल्जियम में रहने वाले वरिष्ठ राजनीतिक टीकाकार फ़ैसल ख़ान का कहना है कि ट्रम्प ने अपने पीछे जिस अमेरिका को छोड़ा है वह बहुत ही चिंताजनक है।

ट्रम्प ने अमरीका में अपने चार वर्षों की सत्ता के दौरान पूरी दुनिया को डराया मगर सब से ज़्यादा खतरे में उन्होंने अमरीकी साम्राज्य को डाल दिया और इसी लिए कहा जा रहा है कि ट्रम्प का अंत, पूरी दुनिया में अमरीकी साम्राज्य के पतन का आरंभ हो सकता है किसी भी साम्राज्य के पतन के आरंभ के लिए जो कुछ ज़रूरी होता है वह सब कुछ ट्रम्प ने अमरीकी साम्राज्य के लिए कर दिया है।  ट्रम्प ने अमरीकियों से जो वादा किया था उन्हें पूरा करने में वह बुरी तरह से नाकाम रहे, वह केवल अमरीका में श्वेतों में नस्लभेद की भावना भड़काने में सफल रहे जैसाकि  हिटलर ने जर्मनी में किया, मसोलेनी ने इटली में और हालिया दिनों में ब्रिटेन और युरोप में ट्रम्प के मित्रो ने। इस संबंध में भारत के वरिष्ठ राजनीतिक टीकाकार डॉक्टर अर्शी ख़ान का कहना है कि ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में सबसे ज़्यादा अगर किसी को नुक़सान पहुंचाया हो तो वह अमेरिका ही है। ट्रम्प ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के महानायकों का खून बहा कर नायक बनने की कोशिश की जिसमें वह बुरी तरह से नाकाम रहे। अब वह विक्टिम रोल करके अपने करोड़ों समर्थकों के दिल में हमदर्दी पैदा करना चाह रहे हैं जो अमरीका में एक टाइम बम की तरह हैं। अरब जगत के प्रसिद्ध टीकाकार अब्दुलबारी अतवान कहते हैं कि ट्रम्प ने इस बात पर गर्व किया है कि उन्होंने कोई युद्ध आरंभ नहीं किया तो वह सही कहते हैं ट्रम्प ने कोई युद्ध आरंभ नहीं किया क्योंकि  उनमें चीन, उत्तरी कोरिया और ईरान से भिड़ने का साहस ही नहीं था क्योंकि उन्हें पता था कि उसका नतीजा क्या निकलने वाला है हां कमज़ोर अरबों  को खूब डराया।

ट्रम्प की भयानक विरासत के साथ अब बाइडन एसी जगह पर खड़े हैं जहां वह अमरीका की टूट फूट को अच्छी तरह से देख रहे हैं। उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ है। ट्रम्प ने अमरीका के दोस्तों को दुश्मन और दुश्मनों को अधिक बड़ा दुश्मन बना दिया है। इन सब से निपटना बाइडन के लिए आसान नहीं होगा अलबत्ता यह बात भी  याद रखना चाहिए कि बाइडन अमरीका के राष्ट्रपति हैं और इस भूमिका में वह इस देश के दूसरे सभी राष्ट्रपतियों से अलग नहीं होंगे, शैली भले ही ट्रम्प जैसी न हो।

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