Feb १२, २०२१ ०९:३२ Asia/Kolkata

दोस्तो दुनिया की इस महत्वपूर्ण साइंस के क्षेत्र में ईरान के सफ़र का महत्वपूर्ण पड़ाव सफ़ीर राकेट से उम्मीद नाम के सैटेलाइट का अंतरिक्ष में स्थापित किया जाना था। ईरान को यह कामयाबी 2 फ़रवरी 2009 को मिली थी।   इस बड़ी सफलता को यादगार बनाने के लिए ईरान ने ईरानी कैलेंडर के ग्यारहवे महीने बहमन की 14 तारीख़ को राष्ट्रीय अंतरिक्ष उद्योग दिवस घोषित कर दिया गया जो 2 फ़रवरी को पड़ा था।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने इस साल यानी 2021 में फ़रवरी महीने के शुरू होते ही एरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा क़दम उठाया और ज़ुल जनाह नाम का सैटेलाइट कैरियर राकेट अंतरिक्ष में लांच किया।  लगभग एक साल पहले की बात है कि ईरान ने ज़फ़र-1 नामक सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए सीमुर्ग़ नामक राकेट के परीक्षण के बाद जो पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका था, यह एलान किया था ज़ुलजनाह नाम के नए सैटेलाइट कैरियर पर काम किया जा रहा हैं। उस वक़्त बताया गया था कि ज़ुलजनाह राकेट नाहीद-1 सैटेलाइट को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। उस समय यह महत्वपूर्ण एलान किया गया था कि ज़ुलजनाह राकेट ठोस ईंधन से चलने वाले प्रोपेलर से युक्त होगा। रक्षा मंत्री जनरल अमीर हातेमी ने बताया कि ईरान ठोस ईंधन से चलने वाले सैटेलाइट कैरियर राकेट पर काम कर रहा है जो दो सौ से ढाई सौ किलोग्राम तक का वज़न अपने साथ ले जा सकते हैं। रक्षा मंत्री जनरल अमीर हातेमी इस बारे में बताते हुए कहते हैं  कि इससे पहले वाले परीक्षण में हमे 95 प्रतिशत की कामयाबी मिली थी, लेकिन इस बार हम अपने लक्ष्य को पाने में पूरी तरह सफल हो गए हैं। सफ़ीर-1 कैरियर की तुलना में अगर ज़ुलजनाह की भारवहन शक्ति देखी जाए तो इसमें दुगनी वृद्धि हुई है। ज़ुलजनाह राकेट तीन चरणों में अपनी उड़ान पूरी करता है। पहले के दो चरण ठोस ईंधन से और और तीसरा व आख़िरी चरण तरल ईंधन से पूरा करता है। ज़ुलजनाह की तीन अनुसंधानिक लांचिंग की जानी थी जिनमें एक लांचिंग पूरी हो गई है जबकि एक से डेढ़ साल के भीतर शेष दो लाचिंग पूरी की जाएगी। साढ़े 25 मीटर लंबे और 52 टन वज़नी राकेट को डिज़ाइन करने का उद्देश्य 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर 220 किलोग्राम के सैटेलाइट को स्थापित करना है। इस तरह यह राकेट ईरान के इससे बड़े और वज़नी राकेट सीमुर्ग़ से काफ़ी क़रीब है जो ढाई सौ से साढ़े तीन सौ किलो वज़नी वस्तु 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर सकता है।

सीमुर्ग़ की तरह ज़ुलजनाह सैटेलाइट कैरियर में भी यह क्षमता है कि वह एक बड़ा सैटेलाइट या 20 किलोग्राम वज़नी दस सैटेलाइट एक साथ आर्बिट में स्थापित कर सकता है। ज़ुलजनाह सैटेलाइट कैरियर राकेट का एक बड़ा लक्ष्य सूर्य की कक्षा तक पहुंचना भी है। ज़ुलजनाह राकेट की सफल लांचिंग ख़ास अंदाज़ में की गई। लाचिंग के समय नेशनल टीवी चैनल पर राष्ट्रीय गीत भी प्रसारित किए गए।  रक्षा मंत्रालय में एरोस्पेस विभाग के प्रवक्ता सैयद अहमद हुसैनी ने राकेट की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि सबसे शक्तिशाली ईंधन यानी सालिड ईंधन की तकनीक हासिल करके ईरान ने बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। सैयद अहमद हुसैनी ने  बताया कि हमारी सैटेलाइट कैरियर के साथ साथ उपग्रहों के क्षेत्र में भी समानांतर परियोजनाएं चल रही हैं। ईरान  की इस अंतरिक्ष सफलता की ख़बरें पूरे विश्व के मीडिया में फैल गईं। अलजज़ीरा ने इस घटना की विस्तार से कवरेज की। अलजज़ीरा टीवी के एंकर ने अपनी कवरेज में कहा कि ईरान ने ज़ुलजनाह नामक उपग्रह रॉकेट के सफल परीक्षण की घोषणा की है।  इसी तरह मयादीन ने टीवी ने भी इस न्यूज़ को कवरेज देते हुए इसे ईरानी राष्ट्र की विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धी बताई है। तुर्की के टीआरटी टीवी ने भी ज़ुलजनाह राकेट की सफल लांचिंग तस्वीरों को प्रकाशित करते हुए इस बारे में बात की है।  यू न्यूज़ ने भी ईरान के ज़ुलजनाह रॉकेट की सफल लांचिंग की ख़बरों में प्रमुखता से दिखाया है। यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह से जुड़े हुए एक वरिष्ठ राजनीतिक टीकाकार अहमद आएज़ अहमद ने भी अपने ट्वीटर एकाउंट पर ज़ुलजनाह राकेट की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है कि, यह दुनिया के सामने ईरान की ताक़त का प्रदर्शन है।  अलमसीरा टीवी ने ज़ुलजनाह राकेट की सफल लांचिंग पर व्यापक्ता से उसकी कवरेज देते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र ने सफलतापूर्ण इस्लामी क्रांति की 42वीं वर्षगांठ पर विज्ञान के क्षेत्र में उसके द्वारा लगाई गई लंबी छलांग का प्रदर्शन किया है 

यह तो विज्ञान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसमें ईरान बड़ी मेहनत से अपना सफ़र तय कर रहा है। ईरान को सामान्य से ज़्यादा मेहनत इसलिए करनी पड़ रही है कि अमरीका ने ईरान पर कई दशकों से प्रतिबंध लगा रखे हैं यही नहीं अगर कोई देश या संस्था ईरान के साथ सहयोग करे तो उस पर भी अमरीका प्रतिबंधों की लाठी लेकर दौड़ पड़ता है। अमरीका से यह नहीं देखा जा रहा है कि ईरान इस तेज़ गति से विकास कर रहा है क्योंकि ईरान के विकास का सीधा संदेश यह है कि अमरीका के प्रतिबंध बेअसर हो गए हैं। इससे दूसरे देशों भी यह हिम्मत मिलेगी कि अमरीका की धमकियों को आसानी से नज़र अंदाज़ करें। अमरीका को ईरान की वैज्ञानिक तरक़्क़ी में केवल यही एक आयाम नज़र आता है कि ईरान की मिसाइल ताक़त तेज़ी से बढ़ती जा रही है अतः दुनिया के देशों के लिए ख़तरा बढ़ रहा है। जहां तक अमरीका की चिंता की बात है तो ईरान से साबित किया है कि उसे इस चिंता की कोई चिंता नहीं है क्योंकि अगर ईरान अमरीका की चिंता दूर करने के चक्कर में पड़े तो पहली बात तो यह है कि अमरीका की चिंता कभी दूर नहीं होगी बल्कि अलग अलग बहानी से फिर जन्म ले लेगी और दूसरी बात यह है कि अमरीका की चिंता दूर करने का सीधा मतलब राष्ट्रीय हितों को नज़रअंदाज़ करना है और ईरान की इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था यह काम हरगिज़ नहीं कर सकती। ईरान की आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के जनरल स्टाफ़ के प्रमुख जनरल बाक़री ने साफ़ साफ़ कहा कि हमारा देश विशेष रूप से रक्षा के क्षेत्र में सैटेलाइट कैरियर राकेट लांच करने की दिशा में भारी सफलताएं ह़ासिल कर रहा है। ईरान का रक्षा विभाग युनिवर्स्टियों और प्रयोगशालाओं से बहुत क़रीबी सहयोग कर रहा है। और इसी सदर्भ में ज़ुलजनाह की लांचिंग की गई और वह अपने निर्धारित आर्बिट में पहुंचा।

ज़ुलजनाह नाम दरअस्ल इस्लामी इतिहास के अनुसार इमाम हुसैन के घोड़े के नाम से लिया गया है जिस पर सवार होकर इमाम हुसैन ने कर्बला का महामुक़ाबला सर किया था। ईरान अपनी इस्लामी क्रांति की 42वीं वर्षगांठ मना रहा है और हर साल क्रांति की विजय की वर्षगांठ पर सभी क्षेत्रों में ईरान की उपलब्धियों को सामने लाया जाता है। ईरान कठिन संघर्ष से स्थायी सफलताएं और विकास हासिल करने का उदाहरण बनता जा रहा है यह हर साल और विशेष रूप से इस्लामी कांति की सफलता की वर्षगांठ पर साबित होता है। 

 

 

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