May १८, २०२२ १६:३६ Asia/Kolkata

उमर ख़य्याम का जन्म उस समय हुआ था जब राजनीतिक दृष्टि से अस्थिरता का माहौल था।

आज 28 उर्दीबहिश्त अर्थात 18 मई है और आज के दिन को उस महान हस्ती की याद में मनाया जाता है जिसने ईरानी कैलेन्डर को संकलित किया है। वह महान हस्ती पांचवीं हिजरी कमरी अर्थात 11वीं शताब्दी के ईरान के महान शायर, विद्वान, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री उमर ख़य्याम हैं। उमर ख़य्याम वह महान हस्ती हैं जो न केवल ईरान बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हैं। उमर ख़य्याम का 427 हिजरी शमसी बराबर 1048 ईसवी में नीशापूर में जन्म हुआ था। ख़य्याम की उपाधि संभवतः उन्हें इसलिए दी गयी क्योंकि उनके पिता नीशापूर में तंबू सिलते थे।

उमर ख़य्याम का जन्म उस समय हुआ था जब राजनीतिक दृष्टि से अस्थिरता का माहौल था। यह वह समय था जब एक तरफ आले बूये की सरकार का अंत हो गया और सत्ता की बागडोर सलजूक़ियों के हाथ में आ गयी और दूसरी ओर सलीबी युद्ध आरंभ हो चुका था और इस्माईली संप्रदाय ईरान के राजनीतिक वातावरण में दाखिल हो चुका था। इन सब हालात में उमर ख़य्याम ईरान के नीशापूर नगर में धर्मशास्त्र, दर्शनशास्त्र, तर्कशास्त्र और गणित जैसे विषयों की शिक्षा प्राप्त करने में लग गये और 22 साल की उम्र में वह गणित के क्षेत्र में एक किताब लिखने में सफल हो गये। अधिकांश ईरानी और दुनिया के बहुत से लोग उमर ख़य्याम को एक शायर के रूप में जानते हैं किन्तु इस बात में कोई संदेह नहीं है कि पहले वह महान विद्वान, हकीम और गणितज्ञ हैं उसके बाद शायर हैं। यही वजह है कि यूनिस्को ने भी इतिहासकारों का अनुसरण करते हुए उन्हें मध्ययुगीन शताब्दी के गणितज्ञ का नाम दिया है। उमर ख़य्याम की अधिकांश किताबें अरबी भाषा में हैं। क्योंकि उस समय इस्लामी जगत की भाषा अरबी थी।

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वर्तमान समय के ईरानी गणितज्ञ गुलाम हुसैन मुसाहिब उमर ख़य्याम के संबंध में कहते हैं कि उमर ख़य्याम वह पहले ईरानी हैं जिन्होंने नक्षत्र व खगोल के बारे में शोध व अध्ययन किया और उसके संबंध में ध्यानयोग्य काम किया और नक्षत्र की महत्वपूर्ण गुत्थियों को सुलझाया। यह सही है कि उमर ख़य्याम गणित के क्षेत्र में विशेष दक्षता रखता थे पर साथ ही पूरे विश्वास से कहा जा सकता है कि उन्होंने नक्षत्र व खगोलशास्त्र के संबंध में भी उल्लेखनीय काम किया है।

जब उमर ख़य्याम ने अपनी पहली किताब खाजा नेज़ामुल मुल्क को उपहार में भेंट की तो इसके बाद उन्होंने उमर ख़य्याम को इस्फहान बुला लिया और वह सुल्तान जलालुद्दीन मलिक शाह सल्जूकी के दरबार में काम करने लगे। उमर ख़य्याम लगभग 18 वर्षों तक इस्फहान में रहे और इस अवधि में उन्होंने दुनिया का सबसे सूक्ष्म कैलेन्डर संकलित किया जिसे फार्सी भाषा में “गाह नामा” कहा जाता है। जिस समय उमर ख़य्याम ने जलाली नाम का कैलेन्डर बनाया उस समय उनकी उम्र मात्र 31 साल थी और ईरानी आज भी उनके कैलेन्डर से लाभ उठा रहे हैं। जलाली या हिजरी शमसी दुनिया का सूक्ष्मतम कैलेंडर है और इससे महीनों का पता लगाने के अलावा साल बदलने का सही समय भी ज्ञात हो जाता है।

दोस्तो यह जानना आपके लिए रोचक होगा कि साहित्य, शेर, गणित और खगोल शास्त्र उमर ख़य्याम के जीवन के महत्वपूर्ण आयाम हैं परंतु यह पूरे नहीं हैं। उमर ख़य्याम दर्शन और तर्कशास्त्र की भी गूढ़ जानकारी रखते थे। इन विषयों के बारे में उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। बहुत से विशेषज्ञ उमर ख़य्याम को दर्शनशास्त्र में इब्ने सीना का उत्तराधिकारी समझते हैं। इसी प्रकार उमर ख़य्याम की संगीत के क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ थी। इसके अलावा उन्होंने ईरान के इतिहास के बारे में “नौरोज़नामा” नाम की एक किताब भी लिखी है। चूंकि उमर ख़य्याम ने विभिन्न क्षेत्रों में ईरान और ईरानी समाज की बहुत सेवा की है इसलिए 28 उर्दीबहिश्त को उनके सम्मान में उमर ख़य्याम दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उमर ख़य्याम एक दक्ष शायर थे। उनकी सुन्दर चौपाइयां, शेर और साहित्य की दुनिया में उनकी बेहतरीन यादगार के रूप में आज भी बाकी हैं। प्रतीत यह हो रहा है कि उमर ख़य्याम ने शेरों का चयन व्यक्तिगत रुचि व बोध के अनुसार किया है और उन्हें प्रकाशित करने में उनकी कोई विशेष रूचि नहीं थी। इसी प्रकार यह भी संभव है कि उमर ख़य्याम ने अपनी विशेष आइडियालोजी और समय के हालात की वजह से पोशीदा रहने और प्रसिद्ध न होने को ही प्राथमिकता दी है। उमर ख़य्याम के जो शेर हैं साहित्यिक सुन्दरता के अलावा उनके बहुत गहरे अर्थ हैं और वे शेर दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में उमर ख़य्याम के दृष्टिकोण के भी परिचायक हैं। हाफिज, सादी और मौलाना जैसे ईरान के दूसरे महान शायरों के विपरीत उमर ख़य्याम ने अपने शेरों को बहुत ही सादी व स्पष्ट भाषा में बयान की है और उनकी यही सादी शैली इस बात का कारण बनी है कि आज उन्हें ईरान और दुनिया में बहुत से लोग एक महान शायर के रूप में जानते हैं।

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अलबत्ता ब्रिटिश शायर एडवर्ड फिटज़ेर्ल्ड की इस कार्य में बहुत भूमिका है। उसने उमर खय्याम के शेरों को अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद किया है और उसने उमर खय्याम के शेरों की मदद से अंग्रेज़ी भाषा में शेर भी कहें हैं। यानी अंग्रेज़ी भाषा में शेर कहने में उमर खय्याम के शेरों से मदद ली है। इस प्रकार उसने एक ओर उमर खय्याम के शेरों का अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद किया तो दूसरी ओर खुद उमर खय्याम के शेरों को आधार बना कर अंग्रेज़ी भाषा में शेर कहे और उसने उमर खय्याम का परिचय एक प्रसिद्ध ईरानी शायर के रूप में कराया है।

वास्तव में उमर खय्याम वह महान ईरानी विद्वान, दर्शनशास्त्री, गणितज्ञ और शायर हैं जिन्होंने कम शेर कह कर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की ख्याति अर्जित कर ली है। उसकी एक वजह यह है कि उमर खय्याम की चौपाइयां शेर नहीं हैं बल्कि दर्शनशास्त्र के बारे में उमर खय्याम के विचार व दृष्टिकोण हैं।

लगभग 83 साल की उम्र में उमर खय्याम का निधन हो गया और ईरान के नीशापूर नगर में उनको दफ्न कर दिया गया। नीशापूर ईरान के पूर्वोत्तर में स्थित है और वहां का फीरोज़ा बहुत मशहूर है। इस नगर में जहां पर उमर खय्याम को दफ्न किया गया था वह कोई अच्छी जगह नहीं थी परंतु वर्ष 1956 में उनकी कब्र पर "उमर खय्याम" नाम की इमारत बनाई गयी जिसे देखने के लिए प्रतिवर्ष हज़ारों ईरानी और ग़ैर ईरानी जाते हैं। उमर खय्याम की समाधि पर जो इमारात बनाई गयी है उसका निर्माण हूशंग सेहून नाम के एक दक्ष ईरानी वास्तुकार ने किया है।

हूशंग सेहून ने उनकी समाधि पर इमारात का निर्माण इस प्रकार से किया है कि वह स्वंय यह दर्शाती है कि इमारात के नीचे जो महान हस्ती व पुरूष सो रहा है वह गणितज्ञ, दर्शनशास्त्री, और खगोलशास्त्री होने के साथ- साथ शायर भी है। उमर खय्याम की समाधि पर जो इमारात बनी है वह 22 मीटर ऊंची है और उसमें 10 स्तंभ हैं और एक स्तंभ की दूसरे स्तंभ से दूरी पांच मीटर है। उमर खय्याम की जो समाधि है वह नीशापूर के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से है। इसी प्रकार यह इमारत ईरानी वास्तुकला का बेहतरीन व सुन्दर उदाहरण है। उमर खय्याम की समाधि और उसके पास का जो दर्शनीय स्थल है उसका क्षेत्रफल 20 हज़ार वर्गमीटर है और उसमें लाइब्रेरी, मेहमान खाना और संग्रहालय भी हैं। इसी प्रकार वहां पर उमर खय्याम की एक प्रतीमा भी लगाई गयी है।

ईरान में जो संगीत बजाये जाते और प्रचलित हैं उनमें से एक नाम का "खय्याम खानी" है। खय्याम खानी ईरान के दक्षिण में और बूशहर प्रांत में बहुत अधिक प्रचलित है। ईरान के दक्षिणी क्षेत्र और प्रांत संगीत की दृष्टि से बहुत समृद्ध क्षेत्र हैं और जो भी संगीत चाहिये वह आपको वहां मिल जायेंगे। बूशहर प्रांत में लोग खुशी के अवसरों पर खय्याम खानी करते हैं। उमर खय्याम के विचार और दृष्टि में दुनिया गुज़र जाने की जगह है। यहां कोई भी नहीं रहेगा। यहां जितना हो सके परलोक के लिए अच्छा काम कर ले वहां पर लोगों के कर्म ही काम आयेंगे। वहां पर दुनिया के पद, स्थान, सम्पत्ति और प्रसिद्ध आदि एक भी काम नहीं आयेगी।

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पैग़म्बरे इस्लाम की मशहूर हदीस भी है जिसमें आप फरमाते हैं कि दुनिया, आखेरत की खेती है। यानी इंसान यहां जो बोएगा वहां वही काटेगा। परलोक में कोई रिश्तेदारी काम नहीं आयेगी। परलोक में इंसान के कर्मों का हिसाब- किताब होगा। वहां पर इंसान इस बात की तमन्ना करेगा कि काश एक बार मुझे दुनिया में जाने का अवसर मिल जाता तो वहां पर महान ईश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करके आता मगर किसी को भी दोबारा दुनिया में आने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

प्रलय के दिन जो लोग स्वर्ग में जायेंगे वह इस बात की तमन्ना करेंगे कि काश और नेक काम कर लिये होते तो स्वर्ग में मुझे और अच्छा स्थान मिलता और जो लोग नरक में जायेंगे वह इस बात पर बहुत पछतायेंगे कि काश गुनाह न किये होते और अमुक व्यक्ति से दोस्ती न किये होते। प्रलय के दिन बहुत से लोग बुरे लोगों की दोस्ती और गलत कार्यो में उनके अनुसरण के कारण नरक में जायेंगे। नरक कितना बुरा ठिकाना है। जो लोग नरक में जायेंगे वे हमेशा- हमेशा दहकती हुई आग में रहेंगे। वहां जाने वालों को कभी भी मौत नहीं आयेगी और वे हमेशा- हमेशा नरक की आग में रहेंगे। वहां पर कोई भी उनकी मदद नहीं करेगा। नरक में जाने वालों को मुंह के बल उसमें फेंका जायेगा।

इसी तरह जो लोग स्वर्ग में जायेंगे वे हमेशा -हमेशा स्वर्ग में रहेंगे और स्वर्ग की नेअमतों से लाभ उठायेंगे। स्वर्ग में जाने वालों को कभी भी मौत नहीं आयेगी। वहां स्वर्ग की सुन्दर अप्सराओं से उनका विवाह किया जायेगा। दोस्तो यहां एक बिन्दु का उल्लेख करना चाह रहे हैं और वह यह है कि जो महिलायें स्वर्ग में जायेंगी महान व समर्थ ईश्वर उन्हें जन्नत की हूरों से भी अधिक सुन्दर बना देगा।

बहरहाल उमर खय्याम वह महान ईरानी दर्शनशास्त्री, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और शायर हैं जिन्होंने ईरान और ईरानी समाज की बेजोड़ और अनमोल सेवायें की हैं। उन्होंने अपने विचारों से लोगों को यह बता दिया है कि दुनिया रहने की जगह नहीं है, यह कर्मभूमि है न कि फलभूमि। अच्छे और बुरे कर्मों का फल परलोक में मिलेगा और जितना हो सके इंसान को अपने परलोक के लिए काम करना चाहिये।

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